रायगढ़/लैलूंगा। विशेष रिपोर्ट।
रायगढ़। छत्तीसगढ़ सरकार जहां भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ और सुशासन का दावा कर रही है, वहीं रायगढ़ जिले के जनपद पंचायत लैलूंगा से सामने आ रही तस्वीरें इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। लाखों रुपये की लागत से निर्मित सीसी सड़कें, सीमेंट नालियां और गाइडवाल कुछ ही महीनों, बल्कि कुछ जगहों पर पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इससे सरकारी धन के उपयोग और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

जमीन पर बिखर गया ‘विकास’
ग्रामीणों का आरोप है कि विकास कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी कर केवल कागजों में काम पूरा दिखाया गया। हालात यह हैं कि जिन निर्माण कार्यों को वर्षों तक टिकना चाहिए था, वे कुछ ही समय में टूटकर बिखरने लगे हैं।

ग्राम जामबाहर
हाल ही में बनी सीमेंट नाली जगह-जगह से चटक गई है। कई स्थानों पर कंक्रीट उखड़ चुका है, जिससे निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्राम सागरपाली
लाखों रुपये की लागत से निर्मित गाइडवाल निर्माण के लगभग एक वर्ष के भीतर ही भरभराकर गिर गई, जिससे निर्माण की मजबूती पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
ग्राम बेसकीमुड़ा
सीसी सड़क की गिट्टियां बाहर निकलने लगी हैं और सड़क के किनारे टूट चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में मानकों का पालन नहीं किया गया।
तकनीकी मानकों की अनदेखी का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीसी सड़क निर्माण में निर्धारित M-20 ग्रेड के बजाय घटिया गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया। साथ ही सड़क की मोटाई भी स्वीकृत मानकों से काफी कम रखी गई। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह निर्माण गुणवत्ता से गंभीर समझौते का मामला हो सकता है।

CEO और RES विभाग पर उठे सवाल
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) विभाग द्वारा निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी नहीं की गई। उनका कहना है कि गुणवत्ता की जांच किए बिना भुगतान किए जाने से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक हो गई है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि—
जामबाहर, सागरपाली, बेसकीमुड़ा सहित सभी हालिया निर्माण कार्यों की थर्ड पार्टी तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए।
यदि निर्माण में अनियमितता साबित होती है तो संबंधित निर्माण एजेंसी, इंजीनियर एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
क्षतिग्रस्त निर्माण कार्यों की राशि दोषियों से वसूल कर पुनः गुणवत्ता के साथ निर्माण कराया जाए।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
लैलूंगा क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे घटिया निर्माण के मामलों ने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।









