✍️ विशेष रिपोर्ट : Vachannews
बिलासपुर/मस्तूरी। विकासखंड मस्तूरी की ग्राम पंचायत सोठी स्थित उपस्वास्थ्य केंद्र आज खुद इलाज का मोहताज बना हुआ है। जिस भवन में गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव सुविधा मिलनी चाहिए, वहां जर्जर छत, टपकता बारिश का पानी, सीलन, गंदगी और जलभराव के बीच प्रसूतियां कराई जा रही हैं। भवन की हालत ऐसी है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता अब भी बरकरार है।

ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत की सरपंच नीमा वस्त्रकार ने उपस्वास्थ्य केंद्र की जर्जर स्थिति को लेकर जनपद पंचायत मस्तूरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को लिखित आवेदन देकर भवन की मरम्मत एवं आवश्यक कार्रवाई की मांग की थी। इसके बावजूद आज तक विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के सरपंच एवं सचिव भी पंचायत स्तर पर किए जा सकने वाले कार्यों—जैसे परिसर में मुरमीकरण, जल निकासी, साफ-सफाई एवं अस्थायी सुरक्षा व्यवस्था—को प्रभावी ढंग से सुनिश्चित नहीं कर सके। इससे बरसात के दिनों में स्वास्थ्य केंद्र परिसर दलदल में तब्दील हो गया है और मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मामले की जानकारी मिलने पर Vachannews की विशेष निरीक्षण टीम मौके पर पहुंची। सह-संपादक पार्थों चक्रवर्ती, साथ में सूरज गाहिरे Vachannews टीम ने स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण में पाया गया कि भवन की छत कई स्थानों से क्षतिग्रस्त है, बारिश का पानी सीधे प्रसूति कक्ष में टपक रहा है, दीवारों में दरारें हैं, फर्श पर सीलन और गंदगी फैली हुई है तथा परिसर में जलभराव बना हुआ है। ऐसे हालात में गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराया जाना गंभीर लापरवाही माना जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि शासन और प्रशासन सुरक्षित मातृत्व की बात करता है, लेकिन सोठी उपस्वास्थ्य केंद्र की तस्वीरें सरकारी दावों की हकीकत बयां कर रही हैं। लोगों ने मांग की है कि भवन की तत्काल मरम्मत कराई जाए अथवा नया उपस्वास्थ्य केंद्र बनाया जाए। साथ ही पंचायत स्तर पर जलभराव, मुरमीकरण और साफ-सफाई जैसी व्यवस्थाएं तत्काल सुनिश्चित की जाएं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते आवश्यक कार्रवाई नहीं हुई और कोई अप्रिय घटना घटित होती है, तो इसकी जवाबदेही स्वास्थ्य विभाग, जनपद पंचायत प्रशासन के साथ-साथ ग्राम पंचायत के जिम्मेदार पदाधिकारियों—सरपंच एवं सचिव—की भूमिका की भी जांच कर तय की जानी चाहिए।









