डोंगरगढ़। विशेष रिपोर्ट।
डोंगरगढ़। तहसील क्षेत्र में संचालित एक सेवा सेतु/CSC सेंटर को लेकर कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि तहसील में सेवा सेतु के पद रिक्त होने के बावजूद कुछ लोग कथित तौर पर CSC ID प्राप्त कर केंद्रों का संचालन कर रहे हैं।
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि संबंधित केंद्र की CSC ID किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज है, जबकि केंद्र का वास्तविक संचालन कथित रूप से कोई दूसरा व्यक्ति कर रहा है। आरोप यह भी है कि ID धारक द्वारा स्वयं केंद्र संचालित करने के बजाय अन्य लोगों के माध्यम से काम करवाया जा रहा है।

ID किसी के नाम, संचालन किसी और का?
CSC व्यवस्था में संचालक की पहचान और केंद्र के संचालन से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि CSC ID किसी व्यक्ति के नाम पर जारी हुई है, तो क्या वही व्यक्ति केंद्र का संचालन कर रहा है? यदि संचालन किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है, तो उसे किस आधार पर अनुमति दी गई?
स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी में मामला होने के बावजूद अब तक स्थिति स्पष्ट करने वाली कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
रिकॉर्ड की जांच से खुल सकता है पूरा मामला
मामले में निष्पक्ष जांच के दौरान संबंधित केंद्र की CSC ID, ID धारक की पहचान, लॉगिन रिकॉर्ड, बायोमेट्रिक गतिविधियां, लेन-देन का विवरण और वास्तविक संचालक की जानकारी का विभागीय रिकॉर्ड से मिलान किया जाना महत्वपूर्ण होगा। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि केंद्र का संचालन अधिकृत व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है या किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से।
यदि जांच में CSC ID के अनधिकृत इस्तेमाल अथवा नियमों के विपरीत संचालन की पुष्टि होती है, तो केवल केंद्र संचालक ही नहीं, बल्कि अनुमति देने या कथित अनियमितता की जानकारी के बावजूद कार्रवाई नहीं करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग उठ सकती है।
राजनीतिक संरक्षण की चर्चाओं पर भी सवाल
वहीं स्थानीय स्तर पर कथित राजनीतिक संरक्षण की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। हालांकि इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति या अधिकारी पर आरोप तय करने से पहले निष्पक्ष एवं दस्तावेजी जांच जरूरी है।
अब निगाहें संबंधित विभाग और प्रशासन पर हैं कि क्या CSC ID और वास्तविक संचालक के रिकॉर्ड की जांच कर पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जाएगी? या फिर सेवा सेतु के संचालन को लेकर उठ रहे सवाल यूं ही अनुत्तरित रहेंगे?








