किसानों की समृद्धि के लिए नई सोच: जैविक खेती को बढ़ावा देने आगे आए कृष्णा प्रजापति

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कोरिया। विशेष रिपोर्ट।

 

 

रासायनिक खाद व कीटनाशकों के संतुलित उपयोग के साथ जैविक खाद अपनाने पर जोर, अगरवुड के व्यावसायिक पौधरोपण से किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में पहल

 

कोरिया। किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता, फसलों की गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर भाजपा कोरिया जिला अध्यक्ष कृष्णा प्रजापति ने एक महत्वपूर्ण पहल का संकल्प लिया है। उनका जोर किसानों को खेती की ऐसी पद्धतियों से जोड़ने पर है, जिसमें उत्पादन के साथ-साथ भूमि की सेहत और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो।

कृष्णा प्रजापति का मानना है कि खेती में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का इस्तेमाल आवश्यकता और वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप संतुलित होना चाहिए। इसके साथ ही किसानों को जैविक खाद, जैविक पोषक तत्व और पर्यावरण-अनुकूल कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक किया जाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

 जैविक खाद से बढ़ेगी मिट्टी की ताकत

जैविक खाद खेती के लिए केवल पोषक तत्वों का माध्यम नहीं, बल्कि मिट्टी की संरचना और जैविक गतिविधियों को बेहतर बनाने वाला महत्वपूर्ण संसाधन है। गोबर खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट तथा अन्य जैविक पदार्थों का उचित उपयोग मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाने में मदद कर सकता है।

इसके नियमित एवं संतुलित उपयोग से—

🔹 मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है।

🔹 मिट्टी की जलधारण क्षमता और संरचना बेहतर हो सकती है।

🔹 लाभकारी सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।

🔹 पौधों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है।

🔹 मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

🔹 रासायनिक इनपुट पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने में सहायता मिल सकती है।

🔹 खेत की दीर्घकालीन उत्पादकता और मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहयोग मिलता है।

हालांकि, किसानों के लिए मिट्टी परीक्षण के आधार पर पोषक तत्वों का संतुलित प्रबंधन करना जरूरी है। जैविक खाद के साथ आवश्यकतानुसार अन्य उर्वरकों का वैज्ञानिक उपयोग भी फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार किया जाना चाहिए।

 अगरवुड बनेगा किसानों के लिए अतिरिक्त आय का विकल्प

कृष्णा प्रजापति किसानों को पारंपरिक खेती के साथ मूल्यवान अगरवुड पौधों के व्यावसायिक रोपण की संभावनाओं से जोड़ने की दिशा में भी कार्य करने का संकल्प ले रहे हैं। उनका उद्देश्य किसानों को केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय कृषि आधारित आय के वैकल्पिक और दीर्घकालिक स्रोतों की जानकारी उपलब्ध कराना है।

अगरवुड की खेती शुरू करने से पहले किसानों को इसकी जलवायु अनुकूलता, पौधरोपण तकनीक, लागत, समयावधि, बाजार व्यवस्था और संबंधित नियमों की पूरी जानकारी लेना आवश्यक होगा। उचित योजना और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के साथ ऐसे पौधों को किसानों की अतिरिक्त आय के संभावित विकल्प के रूप में देखा जा सकता है।

 किसान हित के साथ पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

कृष्णा प्रजापति की पहल का उद्देश्य खेती को केवल फसल उत्पादन तक सीमित न रखते हुए इसे किसान की आर्थिक मजबूती, मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना है। उनका संकल्प है कि किसानों के बीच पहुंचकर जैविक खाद के उपयोग, मिट्टी संरक्षण, संतुलित कृषि पद्धति और व्यावसायिक पौधरोपण के प्रति जागरूकता पैदा की जाए।

उनका मानना है कि आज मिट्टी को बचाना ही कल की खेती और किसान की समृद्धि को बचाना है। यदि किसान मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखते हुए वैज्ञानिक एवं जैविक कृषि पद्धतियों को अपनाते हैं और खेती के साथ आय के नए विकल्प विकसित करते हैं, तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।

“स्वस्थ मिट्टी—समृद्ध किसान—हरित छत्तीसगढ़”

इसी विचार को आधार बनाकर कृष्णा प्रजापति किसानों को जैविक खाद, संतुलित कृषि, पर्यावरण संरक्षण और मूल्यवान पौधों के व्यावसायिक रोपण से जोड़ने की दिशा में जनजागरूकता अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प ले रहे हैं। यह पहल आने वाले समय में किसानों को खेती के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

 

 

 

 

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