भिलाई-चरोदा से कारीगरों के हक की बड़ी पहल! उचित मजदूरी और सम्मान को लेकर विशेष चिंतन बैठक

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भिलाई/चरोदा। विशेष रिपोर्ट।

 

 

 

भिलाई/चरोदा। कारीगरों के हितों, उनके श्रम के उचित मूल्य, सम्मानजनक मजदूरी और अधिकारों को लेकर भिलाई-चरोदा में एक महत्वपूर्ण विशेष चिंतन एवं विचार-विमर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक का नेतृत्व आदरणीय वी. विश्वनाथन आचारी जी ने किया। बैठक में कारीगर वर्ग से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा की गई।

बैठक में मृत्युंजय भगत जी, कृष्णा प्रजापति जी, राजू राजवाड़े जी, सुरेन्द्र कुशवाहा जी सहित अन्य साथीगण उपस्थित रहे। इस दौरान कारीगरों की वर्तमान परिस्थितियों, उनके सामने आने वाली चुनौतियों तथा उनके श्रम और कौशल के अनुरूप उचित पारिश्रमिक सुनिश्चित करने को लेकर विचार साझा किए गए।

 

कारीगरों की मजदूरी तय करने की दिशा में पहल

 

बैठक का प्रमुख विषय कारीगरों के श्रम का उचित मूल्य सुनिश्चित करना और उनकी मजदूरी निर्धारण की दिशा में ठोस पहल करना रहा। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि कारीगर अपने हुनर, अनुभव और मेहनत के माध्यम से समाज और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके काम के अनुरूप उचित मजदूरी और सम्मान मिलना बेहद आवश्यक है।

बैठक में इस बात पर भी मंथन किया गया कि कारीगरों से जुड़े मुद्दों को व्यवस्थित तरीके से सामने लाकर उनके हितों के लिए प्रभावी स्तर पर कार्य किया जाए। इसके लिए आने वाले समय में व्यापक स्तर पर पहल किए जाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

 

भिलाई-चरोदा से उठी आवाज, पूरे छत्तीसगढ़ तक पहुंचने के संकेत

 

कारीगरों के हितों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय को लेकर आयोजित बैठक को आने वाले समय में प्रदेशव्यापी पहल की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। बैठक में हुई चर्चा यदि आगे ठोस कार्ययोजना का रूप लेती है, तो इसका असर छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले कारीगरों तक पहुंच सकता है।

कारीगरों की मेहनत और हुनर को उचित पहचान दिलाने, उनके श्रम का मूल्य निर्धारित करने तथा उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से आगे की रणनीति पर काम किए जाने की संभावना है।

 

‘हुनर की सही कीमत और मेहनत का पूरा सम्मान’ पर जोर

 

बैठक में यह विचार प्रमुखता से सामने आया कि कारीगरों के कौशल और श्रम को केवल काम के रूप में नहीं, बल्कि उनकी विशेषज्ञता और अनुभव के रूप में देखा जाना चाहिए। लंबे समय से अपने हुनर के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले कारीगरों को उनकी मेहनत के अनुरूप पारिश्रमिक मिलना जरूरी है।

इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मजदूरी निर्धारण सहित कारीगरों से जुड़े अन्य विषयों पर भी आगे चर्चा और कार्यवाही किए जाने की दिशा में विचार किया गया।

 

आने वाले समय में दिख सकता है बड़ा असर

 

भिलाई-चरोदा में हुई इस चिंतन बैठक के बाद अब कारीगर हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर आगे की गतिविधियों पर नजर रहेगी। यदि मजदूरी निर्धारण और कारीगरों के अधिकारों को लेकर ठोस कदम आगे बढ़ते हैं, तो यह पहल प्रदेश के बड़ी संख्या में कारीगरों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

 

भिलाई-चरोदा से शुरू हुई यह पहल फिलहाल चर्चा का विषय बनी हुई है और आने वाले समय में इसके व्यापक स्वरूप लेने की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।

 

Vachannews | कारीगरों के हक, सम्मान और अधिकार की आवाज।

 

 

 

 

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