बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में एचआईवी जांच पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। प्रदेश के 140 इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर (ICTC) में बीते दो महीनों से एचआईवी जांच किट की आपूर्ति पूरी तरह ठप है, जिससे हजारों मरीजों की नियमित जांच और संभावित संक्रमितों की समय पर पहचान नहीं हो पा रही है।
इससे सबसे ज्यादा खतरा गर्भवती महिलाओं पर मंडरा रहा है, जिनकी गर्भावस्था के दौरान एचआईवी जांच अनिवार्य होती है। जांच न हो पाने की स्थिति में संक्रमण का प्रसार माँ से नवजात तक हो सकता है।
केंद्र से राज्य को सौंपी गई ज़िम्मेदारी
पहले राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) की ओर से राज्यों को नियमित रूप से जांच किट भेजी जाती थी। लेकिन इस साल से यह जिम्मेदारी राज्यों को सौंप दी गई है। छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) को किट खरीदी का प्रस्ताव भेजा है। बावजूद इसके, दो महीने गुजर जाने के बाद भी अब तक किट अस्पतालों तक नहीं पहुंच सकी है।
प्रभावित हो रहे हजारों मरीज
डॉक्टर मरीजों को एचआईवी जांच के लिए रेफर कर रहे हैं, लेकिन किट न होने के कारण जांच संभव नहीं हो पा रही। विभागीय सूत्रों की मानें तो छत्तीसगढ़ में हर महीने करीब 1 लाख एचआईवी जांच किट की आवश्यकता होती है। मगर सप्लाई बंद होने से अब सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा पूरी तरह बाधित हो गई है।
नियंत्रण के प्रयास ज़रूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही किट की आपूर्ति बहाल नहीं की गई तो यह स्थिति स्वास्थ्य प्रणाली के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। सरकार को तत्काल कार्रवाई कर किट आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि समय रहते एचआईवी संक्रमितों की पहचान कर इलाज शुरू किया जा सके।








