आईटीबीपी कांस्टेबल हत्या मामला: बिलासपुर हाईकोर्ट ने तीन आरोपियों की जमानत याचिका की खारिज

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में घातक आईईडी विस्फोट में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के कांस्टेबल जोगेंद्र कुमार की हत्या के मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ ने विशेष एनआईए अदालत के 14 जनवरी 2025 के आदेश को बरकरार रखते हुए यह फैसला सुनाया।

आरोपी भूपेंद्र नेताम, मोहनलाल यादव और लखनलाल यादव ने सुनवाई में देरी और जांच में विसंगतियों के आधार पर जमानत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इन तर्कों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (यूएपीए) की धारा 43डी(5) के तहत गंभीर आरोपों के मामले में जमानत पर वैधानिक रोक है।

हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ प्रथमदृष्टया पर्याप्त साक्ष्य हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि वे प्रतिबंधित माओवादी संगठन से जुड़े हुए थे और उन्होंने विस्फोट की साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई। जांच में आरोपियों के द्वारा की गई बैठकों, जब्त दस्तावेजों, डेटोनेटर और तारों जैसे सबूतों के आधार पर साजिश में संलिप्तता की पुष्टि हुई है।

एनआईए के वकील ने दलील दी कि आरोप पत्र में यह दर्शाया गया है कि यह हमला राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने की व्यापक साजिश का हिस्सा था।

गौरतलब है कि 17 नवंबर 2023 को विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के बाद आईटीबीपी जवान जोगेंद्र कुमार सुरक्षा बलों के साथ लौट रहे थे, तभी गरियाबंद जिले के बडेगोबरा क्षेत्र में आईईडी विस्फोट किया गया। इसमें कांस्टेबल कुमार गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में उनकी मृत्यु हो गई थी।

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देशित किया है कि यदि आरोपी सहयोग करें, तो मामले की सुनवाई छह माह के भीतर पूरी की जाए।

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