1. पैतृक संपत्ति क्या है?
- पैतृक संपत्ति वो होती है जो आपके पूर्वजों (पिता, दादा, परदादा आदि) से मिली हो।
- इस पर परिवार के सभी हकदार सदस्यों का बराबर हिस्सा होता है।
- अगर अभी तक बंटवारा (partition) नहीं हुआ है, तो यह संयुक्त संपत्ति मानी जाएगी।
2. क्यों जरूरी है हिस्सा अपने नाम करवाना?
- ताकि आपका हक सुरक्षित रहे।
- भविष्य में किसी विवाद या धोखाधड़ी से बचाव हो।
- सरकारी रिकॉर्ड में आपका नाम दर्ज हो सके।
- आगे आप उस हिस्से को बेचने, गिरवी रखने या विरासत में देने के लिए कानूनी मालिक कहलाएँगे।
3. आवश्यक दस्तावेज़
संपत्ति में हिस्सा अपने नाम कराने के लिए ये कागजात ज़रूरी होते हैं:
- वंशावली (Genealogy/Parivar Register) – यह दिखाने के लिए कि आप वैध उत्तराधिकारी हैं।
- खतियान / खसरा / जमीन का रिकॉर्ड – जमीन के असली मालिक और उसका विवरण।
- पहचान पत्र – आधार कार्ड, वोटर आईडी आदि।
- परिवार के सदस्यों की सहमति/नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) – अगर आपसी सहमति से बंटवारा हो रहा है।
- उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate) – अगर मालिक की मृत्यु हो चुकी है।
4. प्रक्रिया (2025 के नियम अनुसार)
(A) आपसी सहमति से बंटवारा
- परिवार के सभी सदस्यों की सहमति लेकर बंटवारा पत्र (Partition Deed) तैयार करें।
- इसे स्टाम्प पेपर पर लिखवाकर रजिस्ट्री कार्यालय (Sub-Registrar Office) में रजिस्टर्ड कराएँ।
- तहसील या राजस्व विभाग में आवेदन कर अपने हिस्से का नामांतरण (Mutation) करवाएँ।
- अब जमीन के रिकॉर्ड (RTC/खसरा/खतौनी) में आपका नाम दर्ज हो जाएगा।
(B) कोर्ट के ज़रिए बंटवारा (विवाद होने पर)
- अगर परिवार के सदस्य सहमत नहीं हैं तो आपको सिविल कोर्ट में मुकदमा करना होगा।
- कोर्ट आदेश देगा कि संपत्ति का बंटवारा कर हर किसी का हिस्सा तय किया जाए।
- कोर्ट के आदेश की कॉपी लेकर राजस्व विभाग/तहसील में जाकर नामांतरण प्रक्रिया पूरी करें।
- उसके बाद सरकारी रिकॉर्ड में आपका हिस्सा दर्ज हो जाएगा।
5. नामांतरण (Mutation) की प्रक्रिया
- तहसील या जिला राजस्व कार्यालय में आवेदन दें।
- आवश्यक दस्तावेज़ (वंशावली, खतियान, कोर्ट आदेश या NOC) जमा करें।
- अधिकारी जांच करके भूमि रिकॉर्ड अपडेट करेंगे।
- इसके बाद जमीन की नकल (जमाबंदी/खतौनी/खसरा) में आपका नाम आ जाएगा।
6. खास बातें (2025 के अपडेट अनुसार)
- अब कई राज्यों में यह प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के जरिए भी संभव है।
- परिवार रजिस्टर और उत्तराधिकार प्रमाण पत्र डिजिटल रूप से उपलब्ध हो रहे हैं।
- कोर्ट केस की सुनवाई और नामांतरण की प्रक्रिया पहले से तेज़ हो गई है।
- अगर सभी उत्तराधिकारी सहमत हों तो प्रक्रिया 30–60 दिन में पूरी हो सकती है।
7. निष्कर्ष
- पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा लेना अब पहले से आसान है, बशर्ते आप सही दस्तावेज़ और कानूनी प्रक्रिया अपनाएँ।
- आपसी सहमति से बंटवारा सबसे आसान और तेज़ तरीका है।
- विवाद की स्थिति में कोर्ट का सहारा लेना पड़ता है।








