भंडारखोल पंचायत में पांच साल चला भ्रष्टाचार का खेल

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गौठान निर्माण में अधूरे कार्यों का पूरा भुगतान, नलकूप- सबमर्सिबल व सिन्टेक्स पर 1.31 लाख की हेराफेरी

कोरबा/पाली। छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ड्रीम प्रोजेक्ट माने जाने वाला गौठान योजना सत्ता परिवर्तन के बाद अधर में लटक गया है। लेकिन इस योजना के संचालनकाल के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों ने जमकर मलाई काटी। ग्राम पंचायत भंडारखोल में भी 14वें और 15वें वित्त की राशि का दुरुपयोग करते हुए लाखों रुपये के वारे-न्यारे करने का मामला उजागर हुआ है।

सूत्रों के अनुसार, पंचायत की तत्कालीन एवं वर्तमान सरपंच प्रतिमा पैकरा ने पंचायत सचिव की सांठगांठ से बीते पांच सालों में सरकारी धन का मनमाना उपयोग किया। शासकीय भवनों की मरम्मत, गोदाम, रनिंग वाटर, बोर खनन, अहाता, पचरी, नाली और सीसी रोड निर्माण के नाम पर राशि निकाली गई, लेकिन कार्य अधूरे रहे या फिर कागजों पर ही पूरे दिखाए गए।

गौठान योजना में भारी गड़बड़ी

साल 2020-21 में 14वें वित्त आयोग से आवंटित राशि पूरी तरह गौठान निर्माण में खर्च दिखाई गई। लेकिन जांच में सामने आया कि अधूरे कार्यों का भी पूरा भुगतान कर लिया गया। उदाहरण के तौर पर, नलकूप खनन, सबमर्सिबल पंप और सिन्टेक्स स्थापना के नाम पर 1.31 लाख रुपये का आहरण किया गया।

जियो-टैग दस्तावेज़ों के अनुसार—

  • 19 अक्टूबर 2020 को ₹30,150
  • 29 अक्टूबर 2020 को ₹53,850
  • 31 अक्टूबर 2020 को ₹17,000
  • 12 मार्च 2021 को ₹30,000

की राशि निकाली गई।

लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि केवल बोर खनन का कार्य हुआ था, जिसकी लागत लगभग 50-60 हजार आई। वहीं सबमर्सिबल पंप और सिन्टेक्स आज तक गांव में दिखाई नहीं दिए।

पांच वर्षों तक मूलभूत राशि का दुरुपयोग

भंडारखोल पंचायत को हर वर्ष मिलने वाली मूलभूत राशि भी शासकीय भवनों और गोदाम की मरम्मत के नाम पर पांच साल तक लगातार खर्च दिखा दी गई। वहीं 15वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग भी योजनाओं में मनमानी कर गबन करने में किया गया।

ग्रामीणों में आक्रोश

ग्राम पंचायत के जानकार ग्रामीणों ने बताया कि जिस तरह सरकारी योजनाओं और निधियों में गड़बड़ी की गई है, उससे साफ है कि सरपंच-सचिव की मिलीभगत से लाखों की हेराफेरी की गई है। ग्रामीणों का कहना है—
“जब विकास की राशि ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी, तो गांव का विकास कैसे संभव होगा?”

जवाबदेही पर सवाल

ग्रामीण अब जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांग रहे हैं। उनका कहना है कि पंचायत स्तर पर इस तरह सरकारी धन की सुनियोजित लूट-खसोट बर्दाश्त योग्य नहीं है। आने वाले समय में ग्रामीणों की मांग पर इस भ्रष्टाचार की और परतें खुलने की संभावना है।

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