रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रतिनिधिमंडल ने हड़ताल समाप्त करने का ऐलान कर दिया है। राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात कर प्रतिनिधिमंडल ने अपनी प्रमुख मांगें पूर्ण होने पर आभार जताया। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि कल से प्रदेशभर में एनएचएम कर्मचारी काम पर लौटेंगे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारियों द्वारा हड़ताल समाप्त करने के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे सराहनीय और राज्यहित में उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार हर कर्मचारी को अपने परिवार का हिस्सा मानती है और उनकी जायज़ मांगों के प्रति संवेदनशील रही है। मुख्यमंत्री ने कहा – “जनता का स्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और सरकार ने सदैव इस दिशा में ठोस पहल की है।”
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि एनएचएम कर्मचारियों के इस निर्णय से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएँ और मज़बूत होंगी तथा जनता को उत्कृष्ट और सुलभ चिकित्सा सुविधाएँ मिलेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों से छत्तीसगढ़ एक बेहतर, स्वस्थ एवं उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर होगा।
गौरतलब है कि एनएचएम कर्मचारी अपनी दस सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर गए थे। राज्य सरकार ने इनमें से चार मांगों को पूरा कर दिया है, तीन अन्य मांगों पर समिति गठित कर कार्यवाही प्रारंभ की गई है, जबकि संविलयन, पब्लिक हेल्थ केडर और आरक्षण संबंधी मांगों पर निर्णय भारत सरकार से लिया जाना है।
इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भी मुख्यमंत्री की पहल पर हड़ताल समाप्त होने पर आभार जताया। उन्होंने कहा कि राज्य का प्रत्येक कर्मचारी परिवार का सदस्य है और एनएचएम कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त कर राज्यहित में सराहनीय निर्णय लिया है।
इस अवसर पर विधायक किरण देव, छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ से डॉ. अमित मिरी, डॉ. रविशंकर दीक्षित, पूरन दास, कौशलेश तिवारी, हेमंत सिन्हा, दिनेश चंद्र, संतोष चंदेल, प्रफुल्ल पाल, डॉ. देवकांत चतुर्वेदी सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।
बता दें कि एनएचएम (National Health Mission) कर्मचारियों की हड़ताल से पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा था। उनकी प्रमुख मांगों में वेतन वृद्धि, मेडिकल अवकाश, कैशलेस इलाज की सीमा और ग्रेड पे बढ़ोतरी शामिल थी। हड़ताल के कारण अस्पतालों में मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही थीं, जिससे आम जनता में नाराजगी भी देखने को मिल रही थी।








