मुंगेली/बलौदाबाजार-भाटापारा। मोचन सिंह सोनवानी विशेष रिपोर्ट।
सत्य, समानता, मानवता और भाईचारे का संदेश लेकर मुंगेली जिले से निकली सात दिवसीय सतनाम शोभायात्रा एवं पदयात्रा श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक एकता के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई। परम पूज्य बाबा गुरु घासीदास जी के महान विचारों और उनके अमर संदेश ‘मनखे-मनखे एक समान’ को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से निकली इस पदयात्रा में 500 से 700 श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
लगातार पांचवें वर्ष आयोजित इस पदयात्रा में श्रद्धालुओं ने कठिन रास्तों और लंबी दूरी की परवाह किए बिना अटूट आस्था, अनुशासन और समर्पण का परिचय दिया। सात दिनों की यात्रा पूरी कर श्रद्धालु पवित्र गिरौदपुरी धाम पहुंचे, जहां उन्होंने बाबा गुरु घासीदास जी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इन प्रमुख पड़ावों से होकर गुजरी ऐतिहासिक पदयात्रा
मुंगेली से प्रारंभ हुई यह पदयात्रा संबलपुर, मारो, चकरवा, नारायणपुर, भाटापारा, कसडोल, बलौदाबाजार और लवन सहित विभिन्न गांवों एवं प्रमुख मार्गों से होकर पवित्र गिरौदपुरी धाम पहुंची।
यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर श्रद्धालुओं का स्थानीय ग्रामीणों एवं सतनाम समाज के लोगों ने आत्मीय स्वागत किया। जगह-जगह स्वागत, सत्कार और सतनाम के जयकारों से पूरा मार्ग भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।
पंथ गीतों और पारंपरिक नृत्य ने बांधा समां
पदयात्रा के दौरान पारंपरिक पंथ गीतों की मधुर धुन और आकर्षक पंथ नृत्य ने पूरे ग्रामीण अंचल में उत्साह का संचार किया। जहां भी श्रद्धालुओं का जत्था पहुंचा, वहां लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
ग्रामीणों ने बाबा गुरु घासीदास जी के उपदेशों को सुना और उनके बताए सत्य, अहिंसा, समानता, सद्भाव तथा मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने एक स्वर में ‘जय सतनाम’ और ‘मनखे-मनखे एक समान’ के जयघोष के साथ सामाजिक भेदभाव मिटाने तथा आपसी प्रेम और भाईचारे को मजबूत बनाने का संदेश दिया।

पांचवें वर्ष भी 500 से 700 श्रद्धालुओं की सहभागिता
इस पदयात्रा की विशेष उपलब्धि यह रही कि यह लगातार पांचवें वर्ष भी पूरी श्रद्धा और निरंतरता के साथ आयोजित हुई। इस वर्ष लगभग 500 से 700 श्रद्धालुओं ने इसमें सहभागिता निभाई।
गिरौदपुरी धाम में दर्शन एवं धार्मिक कार्यक्रमों के बाद 29 अक्टूबर 2026 को जब पदयात्रियों का दल वापस मुंगेली सतनाम भवन पहुंचा, तो वहां उनका भव्य स्वागत किया गया। स्वागत के दौरान पुष्पवर्षा और जय सतनाम के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। श्रद्धालुओं के आगमन पर समाज के लोगों में विशेष उत्साह और उल्लास देखने को मिला।
केवल पदयात्रा नहीं, सामाजिक समानता का संदेश
यह सात दिवसीय यात्रा केवल धार्मिक आस्था और श्रद्धा का आयोजन नहीं रही, बल्कि सामाजिक एकता, समरसता, बंधुत्व और मानवता का संदेश देने वाला अभियान भी बनी।
बाबा गुरु घासीदास जी का संदेश ‘मनखे-मनखे एक समान’ आज भी समाज को समान अधिकार, सम्मान और आपसी सद्भाव की प्रेरणा देता है। इसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए पदयात्रियों ने गांव-गांव तक सतनाम पंथ के सिद्धांतों और मानव कल्याण के संदेश को पहुंचाने का प्रयास किया।
“यह पदयात्रा मात्र एक सफर नहीं, बल्कि समाज में समता, बंधुत्व, भाईचारे और नैतिकता की अलख जगाने वाला एक महाअभियान है। बाबा गुरु घासीदास जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना ही इस यात्रा का मूल उद्देश्य है।”









