‘भारत से दुश्मनी अमेरिका को पड़ेगी भारी’, ट्रंप को उनकी ही पार्टी के सांसद ने दिखाया आईना

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अमेरिका के रिपब्लिकन सांसद रिच मैककॉर्मिक ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर सवाल उठाते हुए भारत के महत्व को रेखांकित किया है. एक प्रतिष्ठित थिंक टैंक के कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने साफ कहा कि भारत के मुकाबले पाकिस्तान अमेरिका में निवेश लाने में पूरी तरह नाकाम रहा है. मैककॉर्मिक के अनुसार भारत न केवल अमेरिका से निवेश लेता है

बल्कि वह खुद भी अमेरिका में भारी निवेश करता है और वहां की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है. उन्होंने पाकिस्तान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 30 करोड़ की आबादी वाला यह देश अमेरिका में कोई निवेश नहीं लाता. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने भारत जैसे भरोसेमंद दोस्त को अलग-थलग करने की कोशिश की तो यह पूरी दुनिया के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है.

भारत की प्रतिभा और रणनीतिक साझेदारी पर दिया जोर
मैककॉर्मिक ने भारत की प्रतिभा शक्ति यानी टैलेंट की जमकर तारीफ की और कहा कि भारत पूरी दुनिया को कुशल पेशेवर दे रहा है. भारतीय लोग न केवल अमेरिका आ रहे हैं बल्कि वे यहां के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पदों को भरकर खाली जगहों को भर रहे हैं.

उन्होंने ट्रंप प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया कि अगर अमेरिका भारत को अपना दोस्त बनाए रखता है तो क्षेत्र में शांति और समृद्धि बनी रहेगी. उन्होंने भारत को चीन के खिलाफ एक मजबूत संतुलन बताया और कहा कि भारत को नजरअंदाज करना अमेरिका के लिए रणनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर बहुत बड़ी भूल साबित होगी. डेमोक्रेट सांसद एमी बेरा ने भी इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि अमेरिकी कंपनियां भारत में अरबों डॉलर लगा रही हैं जबकि पाकिस्तान के साथ ऐसी कोई साझेदारी नहीं है.

रूसी तेल और टैरिफ विवाद पर मोदी सरकार
ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में भारत पर रूसी तेल खरीदने को लेकर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है जिससे कुल टैक्स 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है. व्हाइट हाउस का मानना है कि इस व्यापार से मिलने वाला पैसा रूस को यूक्रेन युद्ध में मदद कर रहा है.

हालांकि मैककॉर्मिक ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बचाव करते हुए उन्हें एक सच्चा राष्ट्रवादी बताया. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी अपने देश का हित देख रहे हैं और सस्ता तेल लेकर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं. हालांकि अमेरिका को यह पसंद नहीं है फिर भी वह भारत की मजबूरियों और जरूरतों को समझता है. द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर चल रहे गतिरोध ने दोनों देशों के रिश्तों को फिलहाल थोड़ा जटिल जरूर बना दिया है.

भारत-अमेरिका संबंधों की तुलना एक शादीशुदा रिश्ते से की
भारत और अमेरिका के संबंधों को समान सोच वाला बताते हुए मैककॉर्मिक ने इसे एक विवाह की तरह बताया जहां संतुलन बनाना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि जिस तरह शादीशुदा लोग तालमेल बिठाते हैं वैसे ही व्यापार और सहयोग में दोनों देशों को एक-दूसरे की जरूरतों का सम्मान करना होगा.

उनका संदेश साफ था कि पाकिस्तान अभी भी अमेरिकी निवेश और रणनीतिक साझेदारी के मामले में भारत से कोसों दूर है. भारत को अलग करना अमेरिका के लिए आर्थिक संकट पैदा कर सकता है क्योंकि भारतीय वस्तुओं का उपभोग और वहां लगने वाले उद्योग अमेरिका के लिए बहुत अहम हैं. कुल मिलाकर अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप को यह समझाने की कोशिश की है कि भारत से बिगाड़ना खुद अमेरिका के पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा.

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