वॉशिंगटन। टैरिफ को लेकर पूरी दुनिया में हाहाकार मचाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अदालत से बड़ा झटका लगा है। यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि ट्रंप द्वारा लगाए गए अधिकांश टैरिफ गैरकानूनी हैं। हालांकि, अदालत ने फिलहाल इन टैरिफ को तत्काल प्रभाव से रोकने से इनकार किया है।
गलत तरीके से प्रयोग की गई शक्तियां
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी इमरजेंसी पावर का दुरुपयोग किया है। अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति को यह अधिकार नहीं दिया जा सकता कि वे पूरी दुनिया के हर देश पर मनचाहा टैरिफ लगा दें। अमेरिकी अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए फिलहाल इन टैरिफ पर रोक नहीं लगाई गई है और प्रशासन को समय दिया गया है।
अक्टूबर तक मिली मोहलत
टैरिफ के बहाने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे ट्रंप के लिए यह एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है। इससे पहले न्यूयॉर्क फेडरल ट्रेड कोर्ट ने भी इसी प्रकार का फैसला सुनाया था, जिसे अब अपील्स कोर्ट ने बहुमत से बरकरार रखा है। 7-4 के फैसले में जजों ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस का इरादा राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का असीमित अधिकार देने का नहीं था। हालांकि, अदालत ने टैरिफ को तुरंत रद्द नहीं किया है और ट्रंप प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए अक्टूबर तक का समय दिया है।
ट्रंप का पलटवार
अदालत के फैसले पर नाराजगी जताते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यदि यह निर्णय लागू होता है, तो यह सचमुच संयुक्त राज्य अमेरिका को तबाह कर देगा। वहीं, व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि राष्ट्रपति ने कानून के दायरे में रहते हुए ही काम किया है और अंततः ट्रंप प्रशासन की ही जीत होगी।
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती की तैयारी
ट्रंप प्रशासन इस फैसले को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। कोर्ट में प्रशासन की ओर से यह दलील दी गई कि 1971 के आर्थिक संकट के दौरान राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के लगाए गए टैरिफ को अदालत ने मंजूरी दी थी। उस समय निक्सन प्रशासन ने 1917 के ट्रेडिंग विद द एनिमी एक्ट के तहत अपने अधिकारों का हवाला दिया था। सरकार का तर्क है कि यदि टैरिफ रद्द होते हैं, तो उसे पहले से वसूले गए आयात कर वापस करने पड़ सकते हैं, जिससे अमेरिकी ट्रेजरी को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है।









