बिहार की राजनीति में शनिवार को बड़ा धमाका हुआ, जब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने अचानक राजनीति छोड़ने और अपने परिवार से दूरी बनाने का चौंकाने वाला ऐलान कर दिया। उनका यह फैसला विधानसभा चुनाव परिणामों के अगले ही दिन सामने आया, जिससे पूरे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
रोहिणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा:
“मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं। संजय यादव और रमीज ने मुझसे यही करने को कहा था। मैं सारा दोष अपने ऊपर ले रही हूं।”
उनका यह बयान कई संकेत छोड़ गया है—क्या पार्टी के भीतर कोई खींचतान चल रही थी? क्या चुनाव में करारी हार के बाद अंदरूनी मतभेद सतह पर आ गए हैं? अभी इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
🔥 आरजेडी में उथल-पुथल
रोहिणी आचार्य के इस कदम ने न सिर्फ आरजेडी में बल्कि पूरे बिहार की राजनीति में खलबली मचा दी है।
- राजद की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
- सबकी निगाहें अब लालू यादव, तेजस्वी यादव और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।
🗳️ चुनाव में राजद की करारी शिकस्त
रोहिणी का यह बयान ऐसे समय आया है जब राजद महागठबंधन के साथ मिलकर चुनाव में बुरी तरह हार गया।
- राजद सिर्फ 25 सीटों पर सिमटी।
- कांग्रेस मात्र 6 सीटों पर रह गई।
- दूसरी ओर भाजपा 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
- एनडीए (भाजपा–जदयू गठबंधन) ने बंपर बहुमत हासिल किया।
चुनाव की इस हार के बाद रोहिणी का अचानक राजनीति से संन्यास और परिवार से दूरी बनाना कई सवाल खड़े कर रहा है।
क्या यह व्यक्तिगत निर्णय है?
या पार्टी के अंदर की कोई गहरी खाई?









