तमिलनाडु में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर दायर कई याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, लेकिन शीर्ष अदालत ने अगली सुनवाई 2 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी। अदालत ने इससे पहले चुनाव आयोग से इस पूरे मामले पर जवाब मांगा था।
कौन-कौन पहुंचे सुप्रीम कोर्ट?
मतदाता सूची के इस SIR अभ्यास के खिलाफ एमडीएमके के संस्थापक वाइको, सत्तारूढ़ डीएमके, और अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) सहित कई दल सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुके हैं। इन दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा किया जा रहा विशेष पुनरीक्षण संवैधानिक रूप से दोषपूर्ण है और इससे लाखों मतदाता अपने अधिकारों से वंचित हो सकते हैं।
डीएमके की याचिका पर क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
डीएमके की ओर से दाखिल याचिका पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष प्रस्तुत हुई। सुप्रीम कोर्ट ने आश्वासन दिया कि मामला उचित समय पर सूचीबद्ध किया जाएगा।
डीएमके के संगठन सचिव आर. एस. भारती ने चुनाव आयोग की 27 अक्टूबर की अधिसूचना को चुनौती दी है, जिसमें 24 जून को जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर SIR प्रक्रिया को तमिलनाडु में विस्तारित किया गया था। याचिका में कहा गया है कि यह प्रक्रिया उचित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क
याचिकाओं में दावा किया गया है कि:
यदि SIR प्रक्रिया को बिना संशोधन जारी रखा जाता है,
और चुनाव आयोग के 24 जून तथा 27 अक्टूबर के आदेश रद्द नहीं किए जाते,
तो लाखों मतदाताओं को मनमाने तरीके से मताधिकार से वंचित किया जा सकता है, जो लोकतंत्र तथा स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मूल भावना के खिलाफ है। याचिकाओं के अनुसार यह संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन है।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट 2 दिसंबर को इन याचिकाओं पर अगली सुनवाई करेगा। तब तक तमिलनाडु में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर बहस जारी रहने की संभावना है।









