बिलासपुर/छत्तीसगढ़
बिलासपुर/छत्तीसगढ़ बंगला अकादमी के तत्वावधान में 7 मार्च को टिकरापारा स्थित बंगो भवन में Salil Chowdhury स्मृति 239वीं बसंत साहित्य संध्या का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम बसंत उत्सव और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें संगीत, कविता, नाटक और नृत्य की प्रस्तुतियाँ हुईं।
कार्यक्रम की शुरुआत अकादमी के गीत की सामूहिक प्रस्तुति से हुई, जिसमें अकादमी के सदस्यों ने भाग लिया।
संगीत प्रस्तुति में निहार रंजन मल्लिक, शुभ्रांशु शेखर घोष, प्रबाल मुखर्जी, असित दत्त, देवाशीष सरकार, अचिन्त्य कुमार बोस और प्रतिमा पाल ने अपनी स्वरांजलि प्रस्तुत की।
कविता पाठ में नमिता घोष, डॉ. गोपाल चंद्र मुखर्जी, रूपा राहा, अशोक कुंडु और आयुष प्रमाणिक ने भाग लिया।
डॉ. गोपाल चंद्र मुखर्जी ने कविता पाठ के साथ संक्षिप्त वक्तव्य देते हुए Salil Chowdhury के साहित्य और संगीत सृजन के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नाटक “खगेन कहाँ” रहा, जिसके लेखक, निर्देशक और अभिनेता असित बरन दास थे।
इस नाटक में डॉ. सोमा लाहिड़ी मल्लिक, उमा दास, मल्लिका सरकार, प्रबाल मुखर्जी और पार्थसारथी बोस ने अभिनय किया।
नृत्य की विशेष प्रस्तुति गोपा दासगुप्ता द्वारा तैयार की गई, जिसमें संतना दासगुप्ता, श्रुति दत्त, तनिमा राय, पूजा पालित, पूजा परमानिक, मौमिता चक्रवर्ती और आयुषी पालित ने भाग लिया।
सामूहिक गीत “ओ रे गृहवासी” पर अकादमी के सभी सदस्य-सदस्याओं ने सामूहिक नृत्य और प्रस्तुति दी।
पूरे कार्यक्रम का संचालन राजा दासगुप्ता ने किया।
कार्यक्रम के आयोजन में प्रबाल मुखर्जी और गोपा दासगुप्ता का विशेष सहयोग रहा।
अकादमी की ओर से नमिता घोष, डॉ. गोपाल चंद्र मुखर्जी, मल्लिका सरकार, अशोक कुमार कुंडु, मोनिका घोष और रूपा राहा को विशेष सहयोग के लिए धन्यवाद दिया गया।
इसके अतिरिक्त मीनू दास, देविका दास, मेरिना घोष, प्रवीर घोष, सुब्रत चट्टोपाध्याय, छंदा घोष, झरना चट्टोपाध्याय, रेवा चौधरी, भक्तिमय चौधरी, वंदना राय, कृष्णा गोस्वामी, सुमिता दासगुप्ता और गोपा बागची को भी धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
विशेष उल्लेखनीय रहा कि नमिता घोष और डॉ. गोपाल चंद्र मुखर्जी अस्वस्थ होने के बावजूद कार्यक्रम में सक्रिय रूप से उपस्थित रहे।
अंत में अकादमी के सभी सदस्यों, कलाकारों, दर्शकों, श्रोताओं तथा आमंत्रित नृत्य कलाकारों और उनके परिवारजनों के सहयोग से कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।










