खरसिया से डॉ रमेश टंडन ने रायपुर साहित्य उत्सव मे शामिल होकर क्षेत्र का बढ़ाया मान

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रायपुर साहित्य उत्सव में 23 से 25 जनवरी 2026 तक पुरखौती मुक्तांगन नया रायपुर में आयोजित हुआ । इसमें खरसिया अंचल के एक मात्र प्रोफेसर साहित्यकार डॉ रमेश टंडन सम्मिलित हुए। इन्होंने ओपन माइक मंच में, जिसका नाम सुरेंद्र दुबे मंडप था, काव्य पाठ किया । उच्च शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ रायपुर की तरफ से समस्त महाविद्यालयों के ऐसे सहायक प्राध्यापक, जो हिंदी विभाग या अंग्रेजी विभाग में पदस्थ हैं और कवि साहित्यकार के रूप में जाने जाते हैं ,

को भी आमंत्रित किया गया था, परंतु रायगढ़ जिले से साहित्यकार सहायक प्राध्यापक के रूप में डॉक्टर रमेश टंडन रायपुर साहित्य उत्सव में उपस्थित हुए और काव्य पाठ किए। इनके काव्य पाठ का शीर्षक पीड़ा था, जो दिसंबर 2012  में दिल्ली में निर्भया के साथ हुई अमानवीय घटना को लेकर था, उस घटना  के बाद नए साल जनवरी 2013 का स्वागत किस अंदाज में करना चाहिए, उसे इन्होंने काव्य पंक्तियों के माध्यम से  दर्शक श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत किया।

इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ी में भी उन्होंने काव्य पाठ किया, जिसका शीर्षक था – तै मोर गुरतुर बोली। दोनों ही कविताएं प्रशासनीय रही। काव्य प्रस्तुति के बाद इन्हें प्रशस्ति पत्र से भी सम्मानित किया गया। बता दें कि पुरखौती मुक्तांगन रायपुर में अनेक मंडप बनाए गए थे जिसमें श्याम लाल चतुर्वेदी मंडप, विनोद कुमार शुक्ल मंडप, सुरेंद्र दुबे मंडप और ऐसे ही कई मंडप थे जहां विभिन्न प्रकार की साहित्यक चर्चाएं, संगीत, गीत, काव्य पाठ, नाटक मंचन और विभिन्न विषयों पर साहित्यिक गतिविधियां आयोजित की जा रही थी।

तीनों ही दिन अलग-अलग मंडपो में अनेक कार्यक्रम संपन्न हुए। पूरे देश भर के नामी साहित्यकार, मीडिया से आए हुए प्रतिष्ठित पत्रकार, संपादक समीक्षक, प्रकाशक, उच्च शिक्षा जगत से जुड़े प्रोफेसर कुलपति आदि सभी ने अपने विचार रखे और साहित्य की समृद्धि के लिए अपने ज्ञान को दर्शक श्रोताओं तक साझा किया।

उत्सव मे पुस्तक मेला का भी आयोजन हुआ, जिसमे डॉ रमेश टंडन की किताब भी प्रदर्शनी के लिए सजी हुई थी। विदित हो कि इनकी आठ किताबे प्रकाशित हो चुकी हैं, जिसमें से पांच एम ए हिंदी के छात्रों के लिए है और दो मौलिक काव्य संग्रह हैं। डॉ रमेश टंडन विश्व हिंदी अधिष्ठान के संस्थापक अध्यक्ष डॉ मीनकेतन प्रधान, डॉ विद्या प्रधान की टीम की ओर से साहित्य उत्सव में शामिल होने वाले  रायगढ़ जिले के महाविद्यालयों की ओर से प्रतिनिधि साहित्यकार थे,जिन्होंने अपनी प्रस्तुति देखकर खरसिया अंचल का मान बढ़ाया। महाविद्यालय परिवार खरसिया ने इनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।

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