कोरबा/पाली : पाली जनपद की ग्राम पंचायत कोरबी में प्रधानमंत्री आवास योजना और मनरेगा में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। रोजगार सहायक भाव सिंह पाटले पर एक ही मकान को दो अलग-अलग हितग्राहियों के नाम पर दर्शाकर आवास की पूरी राशि निकालने का आरोप है। साथ ही एक अन्य महिला हितग्राही की मनरेगा मजदूरी भी दबा लेने की शिकायत की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम कोरबी में धनसिंह पिता मयाराम और नारायण पिता धनसिंह को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अलग-अलग आवास स्वीकृत हुए थे। परंतु रोजगार सहायक भाव सिंह ने मिलीभगत कर दोनों के नाम पर एक ही मकान का निर्माण कराया और पोर्टल पर दो अलग-अलग जियो टैगिंग कर दोनों आवासों की राशि आहरित कर ली। जबकि मौके पर केवल एक ही मकान का निर्माण हुआ। इस फर्जीवाड़े से 1.20 लाख रुपये की गड़बड़ी सामने आई है, जिसे लेकर ग्रामीणों ने जांच की मांग की है।
वहीं, एक अन्य मामले में लाल सिंह कंवर के नाम पर स्वीकृत आवास का निर्माण उनकी पत्नी रामेश्वरी कंवर ने पूरा कराया। उन्हें निर्माण की तीनों किश्तें तो मिल गईं, परंतु मनरेगा के तहत मिलने वाली मजदूरी की राशि नहीं दी गई। रामेश्वरी का आरोप है कि उक्त राशि किसी अन्य व्यक्ति के खाते में डालकर निकाल ली गई। जब उन्होंने रोजगार सहायक से पूछताछ की, तो उन्हें टालने की कोशिश की गई और अंततः धमकाया गया कि “जहां शिकायत करनी है करो, पैसा नहीं मिलेगा।”
रामेश्वरी कंवर ने इस मामले की शिकायत 21 जुलाई को जिला CEO से की, जिसके बाद जनपद सीईओ को जांच के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस गड़बड़ी में संबंधित ब्लॉक समन्वयक की भूमिका भी संदिग्ध है।
यह पूरा मामला न केवल प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि योजनाओं का लाभ कैसे कुछ अधिकारी व्यक्तिगत लाभ के लिए बांट लेते हैं। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस पर कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है।








