निस्वार्थ सेवा की मिसाल: अध्यात्म और वैदिक ज्ञान से रोगियों का हो रहा मुफ्त उपचार

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कोरबा/कटघोरा विशेष रिपोर्ट।

 

 

 

कोरबा/कटघोरा। आज के समय में जब हर चीज़ व्यावसायिक हो गई है, ऐसे में एक बाबा जी ने मानवता और सेवा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है। कटघोरा के पास ग्राम जवाली के पास स्थित दीपका मार्ग के पास वैद्यराज छेद राम जी के द्वारा अध्यात्म और प्राचीन वैदिक ज्ञान के आधार पर पिछले कई वर्षों से विभिन्न प्रकार के रोगों से ग्रसित लोगों का उपचार कर रहे हैं। सबसे विशेष बात यह है कि इसके लिए “वे किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लेते”।

 

प्राचीन विधि, आधुनिक विधि से कष्टों का समाधान

 

वैद्यराज छेद राम जी का मानना है कि शरीर के साथ-साथ मन और आत्मा का स्वस्थ होना भी ज़रूरी है। इसी संकल्प के साथ वे वैदिक मंत्रों, ध्यान, यज्ञ, प्राणायाम और आयुर्वेदिक जीवनशैली के माध्यम से रोगों का निदान करते हैं।

उनके पास दूर-दराज से लोग शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति पाने के लिए आते हैं। बाबा जी प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को न केवल उपचार देते हैं, बल्कि उसे सात्विक जीवन जीने की प्रेरणा भी देते हैं।

 

सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है

 

जब उनसे शुल्क न लेने का कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा,

“रोगी की सेवा करना ही ईश्वर की सच्ची पूजा है। यह ज्ञान हमारे ऋषि-मुनियों की धरोहर है और इसे बेचा नहीं जा सकता।”

 

उनकी यह निस्वार्थ भावना समाज के लिए प्रेरणा बन गई है। सैकड़ों लोग आज स्वस्थ जीवन जी रहे हैं और बाबा जी को अपना मार्गदर्शक मानते हैं।

स्थानीय लोग बाबा जी के इस कार्य को “कलियुग में ऋषि परंपरा का जीवंत रूप” बताते हैं।

 

अध्यात्म और वैदिक ज्ञान  से जुड़ी सेवा का भाव सच में प्रेरणादायक है। प्राचीन वैदिक परंपरा में मंत्र, यज्ञ, ध्यान, आयुर्वेद और जीवनशैली के माध्यम से शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने पर ज़ोर दिया गया है।

 

बाबा जी द्वारा  बिना किसी शुल्क के निस्वार्थ सेवा करना इस भाव को और पवित्र बनाता है। ऐसे लोग समाज में आशा और भरोसे की तरह होते हैं।

वैदिक विधि से रोग निदान में आमतौर पर क्या शामिल होता है:

 

मंत्र चिकित्सा और ध्यान : मन को शांत करके रोग   प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए

आयुर्वेद और प्राकृतिक उपाय : जड़ी-बूटी, खान-पान और   दिनचर्या से संतुलन बनाना

यज्ञ / हवन / पूजा : नकारात्मक ऊर्जा दूर करके     सकारात्मक माहौल बनाना

जीवनशैली मार्गदर्शन : सात्विक आहार, ब्रह्मचर्य,       प्राणायाम।

अध्यात्म और वैदिक उपाय मन की शांति, तनाव कम करने और समग्र स्वास्थ्य में बहुत मदद कर सकते हैं। लेकिन अगर किसी को गंभीर बीमारी, तेज़ दर्द, या कोई पुराना रोग है तो उसके साथ डॉक्टर से जांच और इलाज कराना भी बहुत ज़रूरी है। दोनों साथ चलें तो सबसे अच्छा होता है।

 

 

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