कोरबा। विशेष रिपोर्ट।
कोरबा। लद्दाख के पर्यावरण, स्थानीय समुदायों के अधिकारों और संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चल रहे आंदोलन के समर्थन में सोमवार को आवाज़ फाउंडेशन कोरबा के बैनर तले एक दिवसीय सांकेतिक भूख हड़ताल आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण के पक्ष में एकजुटता दिखाई और संदेश दिया कि “प्रकृति बचेगी, तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा।”

भूख हड़ताल के दौरान वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरणविद् एवं शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक द्वारा उठाए जा रहे मुद्दे केवल लद्दाख तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे देश के जल स्रोतों, प्राकृतिक संसाधनों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि हिमालय का संरक्षण केवल एक क्षेत्रीय विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। ऐसे में सरकार को पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सकारात्मक एवं संवेदनशील पहल करनी चाहिए।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि प्रकृति के साथ लगातार छेड़छाड़ और संसाधनों का अंधाधुंध दोहन जारी रहा, तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम पूरे देश को भुगतने पड़ सकते हैं। इसलिए समय रहते पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस नीतियां और प्रभावी कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर अब्दुल नफिस, सतेंद्र यादव, मनोज राज, गौरव यादव, कन्हैया लाल, सतेंद्र जैन, प्रमोद दिवान, विजय नायक, अंकिता टोप्पो तथा बिलासपुर से भानु चंद्रा सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते हुए पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा और जनहित के मुद्दों पर व्यापक जनजागरण चलाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सरोकारों और जनहित के मुद्दों पर निरंतर जागरूकता फैलाने तथा शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाने का संकल्प लिया।










