देशभर में भीषण गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। झुलसते तापमान के बीच आग लगने की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं, जिससे जन-धन की हानि हो रही है। हाल ही में दिल्ली के प्रीत विहार इलाके में एक प्राइवेट स्कूल में रात के समय आग लग गई, जिसकी चपेट में स्कूल के पास खड़ी एक कार भी आ गई। दमकल विभाग की कई गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। सौभाग्य से कोई हताहत नहीं हुआ।
फायर ऑफिसर फिरोज खान के अनुसार, आग सबसे पहले एक कार में लगी थी जो इमारत के पास खड़ी थी। समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
गर्मी में क्यों बढ़ जाती हैं आग की घटनाएं?
आमतौर पर गर्मी में आग लगने की वजह को प्राकृतिक माना जाता है, लेकिन इसके पीछे इंसानी लापरवाही भी बड़ी भूमिका निभाती है। गर्मियों में एसी, पंखे, कूलर जैसे विद्युत उपकरणों का भारी इस्तेमाल होता है। इससे ओवरलोडिंग और शॉर्ट सर्किट की घटनाएं तेजी से बढ़ जाती हैं। तापमान अधिक होने से तार और उपकरण ज्यादा गर्म हो जाते हैं और आग लगने की संभावना बढ़ जाती है।
ओवरलोडिंग और लचर रखरखाव बना खतरा
ओवरलोडिंग के चलते वायरिंग जल सकती है, ट्रांसफार्मर फट सकते हैं और तार टूट सकते हैं। यह सारी स्थितियां आग के खतरे को और भी बढ़ा देती हैं। इसके अलावा विद्युत उपकरणों का समय-समय पर निरीक्षण न करना, और गैस सिलेंडर, माचिस, मोमबत्ती जैसे ज्वलनशील वस्तुओं को लापरवाही से रखना भी आग का कारण बन सकता है।
सावधानी ही है सुरक्षा की कुंजी
1. इलेक्ट्रिक उपकरणों की क्षमता से अधिक उपयोग न करें।
2. छोटे बच्चों को आग से जुड़ी वस्तुओं से दूर रखें।
3. गैस सिलेंडर की समय-समय पर जांच कराएं।
4. इंजन ओवरहीटिंग से सावधान रहें और ज्वलनशील पदार्थों का सुरक्षित भंडारण करें।
5. संभावित अग्नि क्षेत्रों में पानी और अग्निशमन की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
आपदा में धैर्य है सबसे बड़ी मदद
अगर कभी आग लग जाए, तो घबराएं नहीं। शांत रहें और तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचित करें। संयम और सावधानी से ही किसी बड़ी त्रासदी को टाला जा सकता है।










