जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के जिला उपाध्यक्ष और आर टी आई कार्यकर्ता श्री प्रिंकल दास ने वित्त मंत्री ओपी चौधरी के बयान पलटवार किया और कहा वित्त मंत्री आदरणीय श्री ओपी चौधरी जी आपने बयान दिया कि आपकी कैबिनेट ने नवा रायपुर (शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम) को BCCI के साथ टाइ-अप किया, जिससे अंतर्राष्ट्रीय मैच हो रहे हैं। साथ ही, BCCI आने वाले समय में ट्रेनिंग सेंटर खोलने जा रहा है और राज्य को ग्रोथ हब बनाने का कार्य किया जा रहा है।
यह बयान सुनने में प्रभावशाली लगता है, लेकिन तथ्यों की जांच करने पर यह श्रेय लेने की कोशिश अधिक और वास्तविकता से दूर प्रतीत होता है। आइए, एक-एक करके इन दावों की पड़ताल करें।
स्टेडियम का निर्माण और अंतर्राष्ट्रीय मैचों की शुरुआत: पुरानी नींव पर नया पेंट शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण 2008 में पूरा हुआ और उद्घाटन भी उसी साल हुआ। यह छत्तीसगढ़ राज्य गठन (2000) के बाद की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक था, जिसकी आधारशिला शायद कांग्रेस शासन काल में पड़ी।
स्टेडियम ने 2010 में पहला मैच होस्ट किया (कनाडा vs छत्तीसगढ़ अभ्यास मैच) और 2013 से IPL मैचों की मेजबानी शुरू की।अंतर्राष्ट्रीय मैचों की बात करें तो पहला आधिकारिक इंटरनेशनल मैच जनवरी 2023 में भारत vs न्यूजीलैंड ODI था – यह कांग्रेस सरकार (भूपेश बघेल) के कार्यकाल में हुआ। उसके बाद भी कुछ मैच हुए, लेकिन नियमित अंतर्राष्ट्रीय मैचों की कमी रही क्योंकि BCCI नियमों के अनुसार स्टेडियम का प्रबंधन क्रिकेट एसोसिएशन के पास होना चाहिए।वर्तमान BJP सरकार ने 2025 में कैबिनेट निर्णय लेकर स्टेडियम को 30 साल की लीज पर छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ (CSCS) को सौंपा। यह निर्णय सराहनीय है और इससे टेस्ट मैचों की मेजबानी की संभावना बढ़ी है (2025 में भारत vs दक्षिण अफ्रीका ODI और 2026 में भारत vs न्यूजीलैंड T20 निर्धारित)।
लेकिन मंत्री जी आपका दावा कि “उसी कॉन्ट्रैक्ट से अंतर्राष्ट्रीय मैच हो पा रहे हैं” गलत है। मैच तो पहले भी हो रहे थे; नया लीज केवल भविष्य में अधिक मैच और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करेगा। यह पुरानी उपलब्धि पर नया श्रेय लेने जैसा है।
BCCI ट्रेनिंग सेंटर: अभी केवल योजना, कोई ठोस घोषणा नहीं मंत्री जी ने कहा कि BCCI आने वाले समय में ट्रेनिंग सेंटर खोलने जा रहा है। उपलब्ध तथ्यों से यह स्पष्ट है कि BCCI ने छत्तीसगढ़ में कोई आधिकारिक ट्रेनिंग सेंटर (जैसे NCA स्तर का) खोलने की घोषणा नहीं की है। कुछ स्थानीय अकादमियां हैं (जैसे मनिग्रीव या क्रिकेट फाउंडेशन अकादमी), और राज्य सरकार ने नवा रायपुर में क्रिकेट अकादमी के लिए भूमि आवंटन की योजना बनाई है, लेकिन यह BCCI का नहीं, राज्य क्रिकेट संघ या सरकार का प्रोजेक्ट है। BCCI के ट्रेनिंग सेंटरों की सूची में रायपुर या नवा रायपुर का नाम नहीं है। यह दावा भविष्य की संभावना को वर्तमान उपलब्धि बता रहा है – जो राजनीतिक बयानबाजी तो है, लेकिन तथ्यपूर्ण नहीं।
छत्तीसगढ़ को ग्रोथ हब बनाने का दावा: जमीनी हकीकत क्या?BJP सरकार ने राज्य की GSDP को 5 वर्षों में दोगुना करने (5 लाख करोड़ से 10 लाख करोड़) का लक्ष्य रखा है और कई निवेश प्रस्ताव आए हैं (जैसे ऊर्जा क्षेत्र में 3 लाख करोड़)। नक्सलवाद पर नियंत्रण और बस्तर में विकास कार्य सराहनीय हैं। लेकिन “ग्रोथ हब” का दावा करते समय यह भूलना नहीं चाहिए कि छत्तीसगढ़ की आधारभूत औद्योगिक नींव (इस्पात, बिजली, खनिज) कांग्रेस काल से ही मजबूत है।
पिछली सरकार ने किसान कल्याण योजनाओं, वन अधिकार पट्टों और पर्यटन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया।वर्तमान सरकार की उपलब्धियां (जैसे Mahtari Vandan Yojana, paddy बोनस) अच्छी हैं, लेकिन इन्हें “हम ही कर रहे हैं” कहकर पिछली सरकारों की विरासत को नजरअंदाज करना उचित नहीं। विकास निरंतर प्रक्रिया है – एक सरकार की नींव पर दूसरी मंजिल बनाती है।
निष्कर्ष: श्रेय की राजनीति से ऊपर उठें मंत्री ओपी चौधरी जी का बयान उत्साहजनक है, लेकिन तथ्यों से थोड़ा आगे निकल गया लगता है। स्टेडियम लीज का निर्णय अच्छा है और इससे क्रिकेट प्रशंसकों को फायदा होगा, लेकिन इसे “हमारी कैबिनेट की वजह से सब हो रहा है” कहना अतिशयोक्ति है। राजनीति में श्रेय लेना स्वाभाविक है, लेकिन जनता तथ्यों को जानती है। उम्मीद है कि सरकार आगे भी ऐसे निर्णय लेती रहेगी, बिना पुरानी उपलब्धियों को नकारे। छत्तीसगढ़ का क्रिकेट और विकास दोनों आगे बढ़ें – यही कामना है।







