अफ्रीकी महाद्वीप पर पहली बार आयोजित G-20 शिखर सम्मेलन पर वैश्विक राजनीति की नजर, अमेरिका ने किया बहिष्कार

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जोहानिसबर्ग/नई दिल्ली। इस वर्ष का जी-20 सम्मेलन कई मायनों में ऐतिहासिक साबित होने जा रहा है। पहली बार यह वैश्विक आर्थिक मंच अफ्रीकी धरती पर आयोजित हो रहा है, जिससे “ग्लोबल साउथ” की भूमिका और नेतृत्व को नई मान्यता मिल रही है। दक्षिण अफ्रीका का जोहानिसबर्ग न सिर्फ मेजबान शहर है, बल्कि बदलती वैश्विक व्यवस्था का प्रतीक भी बन गया है।

ग्लोबल साउथ की लगातार चौथी मेजबानी

इंडोनेशिया, भारत और ब्राजील के बाद दक्षिण अफ्रीका मेजबान देशों के उस समूह का चौथा सदस्य है, जिसने हाल के वर्षों में विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक विमर्श के केंद्र में रखा है। यह क्रम दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था का झुकाव लगातार उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ रहा है।


अमेरिका का बहिष्कार और बना कूटनीतिक संकट

सम्मेलन से पहले अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका पर कई आरोप लगाते हुए जी-20 बैठक के बहिष्कार की घोषणा कर दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम उनकी “अमेरिका फर्स्ट” नीति की निरंतरता माना जा रहा है।

सूत्रों का दावा है कि अमेरिका ने अन्य देशों पर भी सम्मेलन के घोषणापत्र पर हस्ताक्षर न करने का दबाव बनाया है। यदि ऐसा हुआ तो:

  • जी-20 की साझा सहमति की परंपरा को झटका लगेगा
  • बहुपक्षवाद की विश्वसनीयता कमजोर होगी
  • और 2026 में जब अमेरिका स्वयं अध्यक्ष बनेगा, तो उसका नैतिक आधार कमजोर पड़ सकता है

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिकी प्रतिनिधित्व के अभाव में दक्षिण अफ्रीका जी-20 की बैटन किसे सौंपेगा, क्योंकि परंपरागत रूप से यह प्रतीकात्मक प्रक्रिया अध्यक्ष देश की उपस्थिति में होती है। यह स्थिति अब तक अभूतपूर्व है और दक्षिण अफ्रीका के लिए नई कूटनीतिक चुनौती बन गई है।


भारत के सामने बड़ा अवसर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जोहानिसबर्ग जाने की तैयारी में हैं। अमेरिका की अनुपस्थिति भारत के लिए एक विशेष अवसर लेकर आई है।

2023 में अपनी अध्यक्षता के दौरान भारत:

  • “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” का सार्वभौमिक संदेश दे चुका है
  • आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्य समूह (DRRWG) की शुरुआत कर चुका है
  • खाद्य सुरक्षा और वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को मुख्यधारा में ला चुका है

अब दक्षिण अफ्रीका उसी एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है, जो भारत की नीतियों की अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति को दर्शाता है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी तीन प्रमुख सत्रों को संबोधित करेंगे:

  1. समावेशी और सतत आर्थिक वृद्धि
  2. आपदा जोखिम न्यूनीकरण व जलवायु परिवर्तन
  3. न्यायपूर्ण और संतुलित भविष्य

ये सभी विषय भारत की प्रमुख नीति प्राथमिकताओं से मेल खाते हैं।


ग्लोबल साउथ की आवाज और नया विश्व संतुलन

जोहानिसबर्ग सम्मेलन से ग्लोबल साउथ की सामूहिकता एक बार फिर सामने आई है। इंडोनेशिया, भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की लगातार अध्यक्षताओं ने:

  • ऋण संकट
  • खाद्य असुरक्षा
  • ऊर्जा परिवर्तन
  • विकासशील देशों की आर्थिक चुनौतियाँ

जैसे मुद्दों को वैश्विक एजेंडा के केंद्र में ला दिया है।

जी-20 अब केवल विकसित देशों का मंच नहीं रहा, बल्कि दक्षिणी गोलार्ध की आकांक्षाओं का वैश्विक प्रतिनिधि मंच बनता जा रहा है।

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