हंसपुर रामनरेश हत्याकांड : करुण डहरिया समेत सभी आरोपियों पर गंभीर धाराओं में आरोप तय, अब शुरू होगा ट्रायल

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बलरामपुर/कुसमी । विशेष रिपोर्ट

 

 

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के बहुचर्चित हंसपुर रामनरेश हत्याकांड में शनिवार 23 मई 2026 को प्रधान सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायालय रामानुजगंज में अहम सुनवाई हुई। मामले में निलंबित तत्कालीन कुसमी एसडीएम करुण डहरिया सहित अन्य आरोपियों के विरुद्ध आरोप पूर्व तर्क (चार्ज आर्ग्यूमेंट) पर विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने सभी प्रमुख धाराओं में आरोप तय कर दिए हैं। अब मामले में नियमित ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी।

 

पुलिस थाना कोरंधा द्वारा प्रस्तुत अभियोग पत्र के अनुसार आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 296, 115(2)/3(5), 103(1)/3(5), 238/3(5) तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(द), 3(1)(घ) एवं 3(2)(v) के तहत अपराध दर्ज किया गया है। इन धाराओं में हत्या, हत्या के प्रयास, सामूहिक हिंसा, गाली-गलौज, साक्ष्य मिटाने और जातिगत अत्याचार जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

 

अभियोजन ने कहा — विवेचना में सभी आरोप प्रथम दृष्टया स्थापित

 

शनिवार को हुई सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक अशोक गुप्ता ने न्यायालय के समक्ष विस्तृत तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा कि पुलिस विवेचना में संकलित साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य दस्तावेजी सामग्री आरोपियों के विरुद्ध गंभीर अपराधों की पुष्टि करती है। अभियोजन पक्ष ने अदालत से आग्रह किया कि सभी आरोपियों पर सभी धाराओं में आरोप तय किए जाएं क्योंकि प्रथम दृष्टया अपराध स्थापित होता है।

 

अभियोजन ने अदालत को बताया कि घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई, कई लोगों के साथ मारपीट की गई, जातिसूचक अपमान किए गए तथा घटना के बाद साक्ष्य मिटाने के प्रयास भी किए गए। चूंकि पीड़ित पक्ष अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित बताया गया है, इसलिए एससी-एसटी एक्ट की धाराएं भी लागू होती हैं।

 

बचाव पक्ष ने प्रशासनिक जांच रिपोर्ट का दिया हवाला

 

वहीं बचाव पक्ष की ओर से निलंबित एसडीएम करुण डहरिया के अधिवक्ता ने अदालत में अलग पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने कहा कि घटना के बाद कलेक्टर कार्यालय बलरामपुर द्वारा गठित जांच टीम की प्रारंभिक रिपोर्ट में उल्लेख है कि घटनास्थल पर 15 से 20 लोगों की भीड़ मौजूद थी तथा दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई थी।

 

बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि कथित बंधकों को छुड़ाने के बाद झड़प में घायल हुए व्यक्तियों को स्वयं करुण डहरिया द्वारा शासकीय वाहन से रात लगभग 10:30 बजे कुसमी अस्पताल पहुंचाया गया था। अधिवक्ता ने अदालत से कहा कि ऐसी परिस्थितियों में आरोपियों को सीधे अपराध में शामिल नहीं माना जा सकता।

 

हालांकि अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य प्रथम दृष्टया विचारण योग्य हैं और सभी प्रमुख धाराओं में आरोप विरचित (चार्ज फ्रेम) किए जाने योग्य हैं। इसके बाद अदालत ने आरोप तय करने का आदेश पारित कर दिया।

 

तीन दिनों तक चलेगी अभियोजन साक्ष्य की सुनवाई

 

न्यायालय ने अब मामले को अभियोजन साक्ष्य के लिए आगामी तिथि पर नियत किया है। जानकारी के अनुसार गवाहों के परीक्षण एवं साक्ष्यों के प्रस्तुतिकरण के लिए तीन दिनों का समय निर्धारित किया गया है। आगामी चरण में अभियोजन पक्ष प्रत्यक्षदर्शियों, दस्तावेजी प्रमाणों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेगा।

 

हत्या से लेकर साक्ष्य मिटाने तक गंभीर आरोप

 

पुलिस विवेचना के अनुसार आरोपियों पर रामनरेश की हत्या, अन्य लोगों के साथ सामूहिक मारपीट, अश्लील गाली-गलौज, हत्या के प्रयास तथा घटना के साक्ष्य छिपाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

 

भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) हत्या से संबंधित गंभीर प्रावधान मानी जाती है, जिसमें दोष सिद्ध होने पर आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक का प्रावधान है। वहीं धारा 3(5) समूह में अपराध किए जाने की स्थिति से संबंधित मानी जा रही है। इसके अतिरिक्त धारा 238/3(5) के तहत साक्ष्य मिटाने अथवा नष्ट करने के आरोप भी शामिल हैं।

 

एससी-एसटी एक्ट की धाराओं को लेकर भी बनी बहस

 

मामले में एससी-एसटी एक्ट की धाराएं जोड़े जाने को लेकर भी कानूनी चर्चा तेज हो गई है। पुलिस का आरोप है कि पीड़ित पक्ष अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित था और सार्वजनिक रूप से जातिगत अपमान तथा हिंसा की गई।

 

हालांकि अदालत में यह तथ्य भी सामने आया कि आरोपी करुण डहरिया स्वयं अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित बताए जा रहे हैं। ऐसे में उन पर एससी-एसटी एक्ट की धाराओं की वैधानिकता और लागू होने की स्थिति को लेकर आगे ट्रायल के दौरान विस्तृत कानूनी बहस होने की संभावना जताई जा रही है। यह बिंदु आगामी सुनवाई में महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।

 

जिले की नजरें अब न्यायालयीन ट्रायल पर टिकीं

 

हंसपुर रामनरेश हत्याकांड शुरू से ही जिले में राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक बहस का विषय बना हुआ है। घटना के बाद विभिन्न समाचार पत्रों, पोर्टलों और सोशल मीडिया पर मामले को लेकर अलग-अलग दावे और कथित कहानियां सामने आती रही हैं।

 

हालांकि इन तमाम बहसों के बीच सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह माना जा रहा है कि घटना में एक आदिवासी व्यक्ति की मौत हुई और पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा रही कि एक प्रशासनिक अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई करना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने विवेचना पूरी कर न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया।

 

अब पूरे मामले में आमजन की निगाहें न्यायालयीन प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं और जिले भर में लोग अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

 

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