बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में न्याय की मिसाल पेश करते हुए हाईकोर्ट ने 26 साल बाद एक दिवंगत थाना प्रभारी को रिश्वत के झूठे आरोप से दोषमुक्त करार दिया है। इस फैसले से दिवंगत टीआई को न्याय तो मिला ही, साथ ही उनकी पत्नी द्वारा लड़ी गई वर्षों लंबी कानूनी लड़ाई भी सफल रही।
मामला वर्ष 1990 का है, जब रायपुर जिले के बसना थाना प्रभारी पर तीन आरोपियों में से एक ने रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था, जबकि वह पहले मारपीट के एक मामले में इन तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर चुके थे। आरोप लगाने वाले व्यक्ति को दो दिन पहले ही मुचलके पर छोड़ा गया था।
उसी आधार पर स्पेशल कोर्ट ने थाना प्रभारी को तीन साल की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की थी। लेकिन अपील लंबित रहने के दौरान उनका निधन हो गया। इसके बाद उनकी पत्नी ने न्याय के लिए लड़ाई जारी रखी।
अब जस्टिस संजय अग्रवाल की एकलपीठ ने उन्हें सभी आरोपों से दोषमुक्त घोषित कर दिया है।
शराब घोटाले में पूर्व मंत्री लखमा की जमानत याचिका खारिज
वहीं दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में गिरफ्तार पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है।
जस्टिस अरविंद वर्मा की बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह फैसला सुनाया।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ ईओडब्ल्यू (EOW) ने भी मुकदमा दर्ज कर जांच के बाद चार्जशीट दायर की थी।
लखमा के वकीलों ने दलील दी कि 2024 में दर्ज केस के करीब डेढ़ साल बाद गिरफ्तारी की गई, जबकि उनके मुवक्किल का पक्ष कभी सुना ही नहीं गया। वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि केवल बयानों के आधार पर उन्हें आरोपी बनाया गया है, कोई ठोस सबूत नहीं है और यह राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा है।








