मातृत्व अवकाश हर मां का अधिकार है, छूट नहीं: हाईकोर्ट

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गोद लेने वाली मां को 180 दिन की छुट्टी देने का आदेश दिया

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी लीव) कोई छूट नहीं, बल्कि हर महिला का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने साफ किया कि जैविक, सरोगेसी या गोद लेने वाली मां में भेदभाव करना गलत है। सभी को समान अधिकार मिलना चाहिए।

यह फैसला आईआईएम रायपुर में काम करने वाली महिला अधिकारी की याचिका पर आया। उन्होंने बताया कि उन्होंने 2 दिन की नवजात बच्ची को गोद लिया, और इसके बाद 180 दिन की छुट्टी के लिए आवेदन किया था। लेकिन संस्थान ने केवल 60 दिन की छुट्टी दी और बाद में बढ़ाकर 84 दिन की। महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

कोर्ट ने क्या कहा

जस्टिस विभू दत्त गुरु की सिंगल बेंच ने कहा कि नवजात को मां की देखभाल सबसे ज़्यादा पहले साल में चाहिए होती है। इसलिए गोद लेने वाली मां को भी वही अवकाश मिलना चाहिए जो जैविक मां को मिलता है। कोर्ट ने कहा कि यह जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है।

जहां संस्था का नियम स्पष्ट नहीं, वहां लागू होता है केंद्र सरकार का नियम

महिला के वकील ने बताया कि जहां संस्था के नियम स्पष्ट न हों, वहां केंद्र सरकार के नियम लागू होते हैं। केंद्रीय सिविल सेवा नियम 1972 की धारा 43-B और 43-C के तहत गोद लेने वाली मां को भी 180 दिन की छुट्टी का अधिकार है।

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