मोहन भागवत ने बताया अमेरिका को जवाब देने का तरीका : आत्मनिर्भर भारत से ट्रंप की हवा निकलेगी

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नई दिल्ली :- अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाए जाने के बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने पहली बार इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। उनका बयान केवल एक व्यापारिक नीति पर प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वदेशी को लेकर एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।

भागवत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार दबाव में नहीं, बल्कि स्वेच्छा से होना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए कहा कि भारत को किसी भी देश के दबाव में आए बिना अपनी नीतियों पर टिके रहना चाहिए।

आत्मनिर्भरता ही समाधान

भागवत ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“आत्मनिर्भरता सब बातों की कुंजी है। जो चीज हमारे घर में बनती है, उसे बाहर से लाने की क्या जरूरत है।”

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने देश में बने उत्पादों को प्राथमिकता दें और स्वदेशी को जीवन का हिस्सा बनाएं।

स्वदेशी को बढ़ावा देने का आह्वान

आरएसएस प्रमुख ने उदाहरण देते हुए कहा—
“कोका-कोला की जगह नींबू की शिकंजी पी सकते हैं, घर का अच्छा खाना खाइए, पिज्जा की क्या जरूरत है।”

उन्होंने साफ संदेश दिया कि विदेशी उत्पादों पर निर्भरता घटाना ही अमेरिका के टैरिफ का सबसे मजबूत जवाब है।

सामाजिक समरसता पर विशेष जोर

मोहन भागवत ने सामाजिक एकता की अहमियत को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि—
“हम मनुष्य को जाति के आधार पर बांटना बंद करें। मंदिर, पानी और श्मशान सभी के लिए समान रूप से खुले हैं, इनमें किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए।”

भारत की तरक्की के लिए आवश्यक कदम

भागवत का यह बयान तीन महत्वपूर्ण पहलुओं को जोड़ता है—

  • आर्थिक आत्मनिर्भरता : स्वदेशी उत्पादों का अधिकतम उपयोग।
  • सामाजिक समरसता : जातिगत भेदभाव खत्म कर सबके लिए समान अधिकार।
  • सांस्कृतिक गर्व : अपनी परंपराओं और संसाधनों को अपनाना।

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