रायपुर में राष्ट्रीय आम महोत्सव: 3.45 लाख/kg का मियाजाकी आम बना आकर्षण, 200 वैराइटी और 56 व्यंजन

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रायपुर।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर इन दिनों आम प्रेमियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय आम महोत्सव में देश-विदेश के 200 से अधिक आमों की किस्में और 2000 से ज्यादा आमों की प्रदर्शनी लगाई गई है, जिसमें 450 से अधिक किसान शामिल हुए हैं। महोत्सव का मुख्य आकर्षण बना है जापान का विश्वप्रसिद्ध मियाजाकी आम, जिसकी कीमत ₹3.45 लाख प्रति किलो तक आंकी गई है।

मियाजाकी आम ने बटोरीं सुर्खियाँ

जापानी नस्ल का मियाजाकी आम अपने अनोखे स्वाद, आकर्षक रंग और भारी वजन के कारण दुनियाभर में प्रीमियम श्रेणी में गिना जाता है। इस आम को छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के रिटायर्ड जीएम राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने अपने निजी फार्म पर उगाया है। दिलचस्प बात यह है कि वे इस आम को न बेचकर केवल प्रदर्शनी के लिए शोकेस करते हैं। इसकी सुरक्षा में दो अल्सेशियन कुत्ते और CCTV कैमरे लगाए गए हैं।

बस्तर से अफगानिस्तान तक की आम की झलक

इस आयोजन में बस्तर के घने जंगलों में पाए जाने वाले देसी गोल आम से लेकर अफगानिस्तान, पाकिस्तान, थाईलैंड और फिलीपींस जैसी जगहों से लाई गई विदेशी किस्मों तक — हर किस्म का स्वाद और आकार मौजूद है। यहाँ आम का आकार 2 इंच से लेकर 15 इंच तक देखने को मिला।

आम के 56 स्वाद – व्यंजन भी बने आकर्षण

महोत्सव में आम से बने 56 प्रकार के पारंपरिक और नवाचार व्यंजन भी प्रदर्शित किए गए हैं। आमरस, आम की बर्फी, मैंगो खीर, आइसक्रीम, चटनी से लेकर मैंगो बिरयानी तक – हर जायका आम प्रेमियों को लुभा रहा है।

‘हूर पाकिस्तानी’ आम को लेकर विवाद

प्रदर्शनी में ‘हूर पाकिस्तानी’ नामक आम की किस्म ने हल्का विवाद खड़ा किया। आयोजकों ने तकनीकी कारणों से इसका नाम हटाने की बात कही, जबकि सूत्रों का दावा है कि नाम को लेकर आपत्ति जताई गई थी। हालांकि ‘सिंधू’ नामक पाकिस्तानी नस्ल का आम अब भी प्रदर्शनी में है, जिसे भारतीय किस्म भी माना जाता है।

मुख्यमंत्री ने थामा ‘हाथीझुल’ आम

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी इस भव्य आयोजन में हिस्सा लिया और ‘हाथीझुल’ नामक आम को हाथ में लेकर प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस किस्म का वजन 2 से 4 किलो तक होता है। मुख्यमंत्री ने आम को ‘फलों का राजा’ बताते हुए स्थानीय किसानों के प्रयासों की सराहना की और जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात कही।

फलों के साथ पौधों की भी बिक्री

आयोजन में आम के फलों के साथ-साथ उनकी पौध भी बिक्री के लिए उपलब्ध है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने मुख्यमंत्री को प्राकृतिक रूप से पके आमों की टोकरी भेंट की और बताया कि यह उत्सव किसानों को नवाचार और विपणन के नए अवसर प्रदान कर रहा है।

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