नई दिल्ली। केंद्र सरकार प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ करने की तैयारी में है। सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना से जुड़े सूत्रों के अनुसार, नया परिसर अपने अंतिम चरण में है और इसका नाम शासन में हो रहे सांस्कृतिक व नैतिक बदलाव को दर्शाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि यह नाम परिवर्तन भारतीय प्रशासनिक ढांचे में शक्ति के बजाय सेवा, जिम्मेदारी और पारदर्शिता को प्राथमिकता देने की नई सोच का प्रतीक है। पहले ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ कहलाने वाला यह परिसर अब ‘सेवा तीर्थ’ के रूप में कार्य करेगा, जहाँ प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ-साथ कैबिनेट सचिवालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और ‘इंडिया हाउस’ भी संचालित होंगे। ‘इंडिया हाउस’ अंतरराष्ट्रीय स्तर की उच्च-स्तरीय वार्ताओं का प्रमुख स्थल होगा।
अधिकारियों ने बताया कि ‘सेवा तीर्थ’ शासन की उस भावना को मूर्त रूप देगा, जिसमें सत्ता को अधिकार नहीं बल्कि सेवा और जवाबदेही का दायित्व माना गया है। उन्होंने कहा कि भारत की सार्वजनिक संस्थाएँ एक शांत लेकिन महत्वपूर्ण परिवर्तन के दौर से गुजर रही हैं, जहाँ शासन की अवधारणा ‘शक्ति’ से ‘सेवा’ और ‘अधिकार’ से ‘कर्तव्य’ की ओर बढ़ रही है।
इसी क्रम में राज्यों के राज्यपाल आवास ‘राजभवन’ का नाम बदलकर ‘लोक भवन’ किया जा रहा है, ताकि यह जनता से जुड़ाव और जनसेवा के मूल्यों को दर्शा सके। प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास भी पहले 2016 में बदलकर लोक कल्याण मार्ग कर दिया गया था।
इसके अलावा केंद्रीय सचिवालय का नया नाम ‘कर्तव्य भवन’ रखा गया है, जिससे जनसेवा की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया है। कुछ वर्ष पूर्व ‘राजपथ’ का नाम भी ‘कर्तव्य पथ’ किया गया था, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि शासन शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाने की जिम्मेदारी है।









