रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू करने की प्रक्रिया एक बार फिर तेज हो गई है। प्रदेश सरकार और पुलिस मुख्यालय (PHQ) नए पुलिस कमिश्नर की नियुक्ति को लेकर मंथन में जुटे हैं। इस पद के लिए ADG या IG रैंक के अधिकारियों के नामों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
पहले इसे 1 नवंबर से लागू करने की तैयारी थी, लेकिन कमिश्नर के चयन पर सहमति न बनने के कारण प्रक्रिया अटक गई थी।
कमिश्नरेट मॉडल पर समिति की रिपोर्ट
PHQ द्वारा गठित समिति ने अक्टूबर में अपनी विस्तृत रिपोर्ट डीजीपी को सौंपी थी। रिपोर्ट में—
- ओडिशा और मध्य प्रदेश के कमिश्नरेट मॉडल का तुलनात्मक अध्ययन,
- दोनों मॉडल के फायदे–चुनौतियाँ,
- स्टाफिंग पैटर्न
शामिल किए गए थे।
रिपोर्ट में बताया गया कि रायपुर में कमिश्नरेट सिस्टम को प्रभावी बनाने के लिए 500 से अधिक नए स्टाफ की आवश्यकता होगी। साथ ही विभागीय संरचना में बदलाव, नई शाखाओं का गठन और ट्रैफिक सिस्टम का पुनर्गठन भी जरूरी माना गया है।
फुलप्रूफ व्यवस्था की तैयारी में गृह विभाग
गृह विभाग लगातार समीक्षा कर रहा है ताकि नए सिस्टम में कोई कमी न रहे। वर्तमान SP–CSP पैटर्न पर स्टाफ पहले से ही भारी दबाव में है, इसलिए बड़े रैंक के अधिकारियों की तैनाती आवश्यक मानी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, DGP कॉन्फ्रेंस के बाद IG और SP स्तर पर बड़े स्तर पर फेरबदल संभव है, जिससे कमिश्नरेट व्यवस्था के लिए आवश्यक ढांचा तैयार किया जा सके।
तेज़ पुलिसिंग और जवाबदेही की उम्मीद
कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद—
- पुलिसिंग की गति बढ़ने,
- जवाबदेही मजबूत होने,
- और कानून-व्यवस्था में सुधार होने
की उम्मीद जताई जा रही है।
अगर सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो रायपुर में 1 जनवरी से पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू किया जा सकता है।







