देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफा देने के बाद अब नए उपराष्ट्रपति के चयन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस पद के लिए संभावित चेहरों की सूची में कई बड़े नेताओं के नाम पहले ही चर्चा में थे, लेकिन अब इस दौड़ में एक नया और चौंकाने वाला नाम जुड़ गया है—केंद्रीय राज्य मंत्री और जेडीयू सांसद रामनाथ ठाकुर का।
बुधवार शाम रामनाथ ठाकुर ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की, जिसके बाद उनके नाम की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। माना जा रहा है कि यह मुलाकात सिर्फ शिष्टाचार नहीं थी, बल्कि उपराष्ट्रपति पद को लेकर गंभीर राजनीतिक संकेत दे गई।
कौन हैं रामनाथ ठाकुर?
रामनाथ ठाकुर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी विचारक कर्पूरी ठाकुर के बेटे हैं। राजनीति में उनका लंबा अनुभव रहा है। वे लालू यादव की पहली सरकार में मंत्री रहे और बाद में 2005 से 2010 तक नीतीश सरकार में भी कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। वर्तमान में वे कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री हैं और जेडीयू कोटे से मोदी सरकार में शामिल हैं।
हाल ही में उनके पिता कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था, जिससे ठाकुर परिवार की राजनीतिक प्रासंगिकता एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर उभरी है। अब रामनाथ ठाकुर की उपराष्ट्रपति पद की रेस में एंट्री को उसी सम्मान के राजनीतिक विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।
क्यों बढ़ गई हैं ठाकुर की संभावनाएं?
बिहार में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में अगर एनडीए सरकार बिहार से किसी बड़े नेता को उपराष्ट्रपति बनाती है, तो यह वहां के मतदाताओं को एक बड़ा संदेश दे सकता है। साथ ही इससे जेडीयू को भी केंद्र की राजनीति में अहम भूमिका मिल जाएगी।
बीजेपी को इस समय लोकसभा में पूर्ण बहुमत नहीं है और सरकार जेडीयू व टीडीपी जैसे सहयोगियों के समर्थन से चल रही है। ऐसे में उपराष्ट्रपति पद जेडीयू कोटे से देने की रणनीति एनडीए के गठबंधन को और मजबूत कर सकती है। पहले नीतीश कुमार का नाम उपराष्ट्रपति पद के लिए चल रहा था, लेकिन वे चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद छोड़ने को तैयार नहीं बताए जा रहे हैं। इसलिए अब रामनाथ ठाकुर को संभावित चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है।
संभावित नामों की सूची में कौन-कौन?
रामनाथ ठाकुर के अलावा, उपराष्ट्रपति पद की रेस में कई अन्य नामों की भी चर्चा है। इनमें प्रमुख रूप से हरिवंश नारायण सिंह, राजनाथ सिंह, और मनोज सिन्हा शामिल हैं। हालांकि, मोदी सरकार अपने अप्रत्याशित फैसलों के लिए जानी जाती है, इसलिए अंतिम नाम की घोषणा तक किसी भी संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।










