अंबिकापुर राज्य में लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। राजधानी रायपुर से लेकर सरगुजा तक अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में पेट्रोल पंप पर कार्यरत युवती की दिन-दहाड़े चाकू मारकर हत्या, सूरजपुर का दोहरा हत्याकांड, बलरामपुर कस्टोडियल डेथ और रायपुर में बढ़ती चाकूबाजी जैसी घटनाएँ शासन-प्रशासन की नाकामी को उजागर कर रही हैं। वहीं आर्थिक अपराधियों का जाल भी प्रदेश में पैर पसार चुका है।
वर्तमान भाजपा सरकार पर विपक्ष ही नहीं, बल्कि सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था बदहाल हुई है और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त दिख रही है।
सरगुजा को नतीजा शून्य
जनता ने 2023 में कांग्रेस को करारी हार देकर भाजपा को सत्ता सौंपी थी। बदले में सरगुजा संभाग से मुख्यमंत्री और कई मंत्री भी बनाए गए, लेकिन जनता को विकास और सुरक्षा के नाम पर कुछ ठोस नहीं मिला। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार की बागडोर नेताओं से ज्यादा प्रशासनिक अधिकारियों और रसूखदारों के हाथों में है।
कांग्रेस सरकार की तुलना
लेखक-शोधकर्ता अकील अहमद अंसारी ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार की उन्होंने तीखी आलोचना की थी और इसके चलते कई फर्जी मुकदमों का भी सामना किया। लेकिन उस समय बड़े अपराधियों पर कार्रवाई होती थी, भू-माफिया जेल जाते थे और जनता की शिकायतों पर प्रतिक्रिया मिलती थी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के दौर में अधिकारियों पर अंकुश दिखता था, जबकि मौजूदा सरकार में ऐसी दृढ़ता और नेतृत्व क्षमता का अभाव नज़र आता है।
मीडिया और प्रशासन पर सवाल
स्थानीय बुद्धिजीवियों और पत्रकारों का कहना है कि आज स्थापित मीडिया सत्ता की आलोचना करने से बच रहा है। रसूखदारों से जुड़ी खबरें दबा दी जाती हैं और पुलिस विभाग पर सीधी चर्चा शायद ही कभी होती है। इससे आम नागरिकों का भरोसा शासन-प्रशासन और मीडिया दोनों से उठता जा रहा है।
जनता की दुविधा
प्रदेश की स्थिति पर गहरी निराशा जताते हुए लोगों का कहना है कि –
सरकार फेल है।
जनप्रतिनिधि कमजोर साबित हो रहे हैं।
प्रशासनिक मनमानी चरम पर है।
मीडिया सत्ता की चाटुकारिता में व्यस्त है।







