कोटा के करई कछार गांव में बैगा-बिरहोर महिलाओं को रानी मिस्त्री बनने की राह – आत्मनिर्भरता की मिसाल

Spread the love

कोटा, 09 जुलाई। बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड अंतर्गत ग्राम करई कछार की महिलाओं को अब आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई देने लगी है। यहां की 35 महिलाएं – जिनमें बैगा और बिरहोर जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG) की महिलाएं शामिल हैं – अब रानी मिस्त्री बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। जिला प्रशासन की पहल पर गांव में ही रानी मिस्त्री का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे महिलाएं अब निर्माण कार्यों में दक्ष बन रही हैं।

यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की बिहान योजना के अंतर्गत आरसेटी (RSETI) के सहयोग से प्रारंभ किया गया है। प्रशिक्षण के लिए पीएम आवास योजना के तहत निर्माणाधीन मकानों को प्रयोगशाला के रूप में उपयोग में लाया जा रहा है, जिससे महिलाओं को सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान भी मिल रहा है।

गांव में प्रशिक्षण मिलने से बढ़ा उत्साह

प्रशिक्षण प्राप्त कर रहीं श्रीमती तुलसी बैगा बताती हैं कि इस प्रशिक्षण में उन्हें ईंट जोड़ने, माप-नाप लेने, लेवलिंग, प्लास्टर और छज्जा निर्माण जैसे कार्यों का व्यावहारिक अभ्यास कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें न केवल तकनीकी ज्ञान मिला है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है। तुलसी को उम्मीद है कि प्रशिक्षण के बाद उन्हें पीएम आवास योजना के तहत आवास निर्माण कार्य में रोजगार मिलेगा।

वहीं, सिया बाई बैगा ने कहा कि गांव में ही प्रशिक्षण मिलने से उन्हें घर-परिवार छोड़कर बाहर नहीं जाना पड़ा, जो एक बड़ी राहत है। उन्होंने बताया कि बिहान योजना से जुड़कर उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है और अब वे घर के बाहर निकलकर आर्थिक सहयोग कर पा रही हैं।

PVTG समुदाय की महिलाओं के लिए खास पहल

बैगा और बिरहोर जैसी जनजातियां अब तक जंगल और दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर थीं। ऐसे में शासन की इस पहल ने उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में नई राह दिखाई है। लखपति दीदी योजना से भी इन्हें जोड़ा जा रहा है, ताकि आय के नए स्रोत विकसित हो सकें।

आत्मनिर्भरता की ओर एक मजबूत कदम

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे वे केवल पारंपरिक कार्यों तक सीमित न रहकर निर्माण, उद्यम और अन्य तकनीकी कार्यों में भी हाथ आजमा सकें। रानी मिस्त्री के रूप में प्रशिक्षित यह महिलाएं भविष्य में आवास निर्माण जैसे कार्यों में भाग लेकर न केवल सम्मानजनक जीवन जिएंगी, बल्कि अपने परिवारों की आर्थिक रीढ़ भी बनेंगी।

महिलाओं ने गांव में ही प्रशिक्षण सुविधा उपलब्ध कराने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है और आशा जताई है कि यह पहल उनके जीवन को नई दिशा देगी।

Related Posts

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दी बधाई, कहा- युवा शक्ति की सफलता विकसित छत्तीसगढ़ की नई पहचान

Spread the love

Spread the love    रायपुर/छत्तीसगढ़       रायपुर 18 जून 2026/ संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 के परिणामों में छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि…

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर 21 जून को प्रदेश में “स्वस्थ आयु के लिए योग” थीम पर होगा विशेष कार्यक्रम

Spread the love

Spread the loveरायपुर/छत्तीसगढ़   रायपुर/छत्तीसगढ़, 17 जून 2026/ 21 जून 2026 को इस बार “स्वस्थ आयु के लिए योग” थीम पर सामूहिक योगाभ्यास का कार्यक्रम आयोजित होगा। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!