रायपुर/ बिलासपुर। विशेष रिपोर्ट।
भोजली महोत्सव समिति ने कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब को सौंपा ज्ञापन, ‘मितानी–मितान दिवस’ घोषित करने का भी किया आग्रह।
रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, सामाजिक समरसता और पारंपरिक विरासत के प्रतीक भोजली पर्व को राज्य स्तर पर विशेष पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। भोजली महोत्सव समिति, तोरवा (बिलासपुर) के प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब से रायपुर स्थित उनके निजी निवास पर सौजन्य भेंट कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में समिति ने मांग की कि भोजली पर्व को छत्तीसगढ़ का “राज्य विशेष लोकपर्व” घोषित किया जाए तथा इस अवसर पर एक दिन का शासकीय अवकाश घोषित किया जाए। समिति ने यह भी आग्रह किया कि इसी दिन पूरे प्रदेश में मनाए जाने वाले “मितानी–मितान दिवस” को भी आधिकारिक राज्य पर्व के रूप में मान्यता दी जाए, ताकि छत्तीसगढ़ की अनूठी मित्रता, भाईचारे और सामाजिक एकता की परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सके।
समिति ने कहा कि भोजली केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण, कृषि संस्कृति, महिला शक्ति, लोक आस्था और सामाजिक सौहार्द का जीवंत उत्सव है। वर्षों से प्रदेश के गांव-गांव में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाए जाने वाले इस लोकपर्व को राज्य स्तर पर विशेष दर्जा मिलने से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाई मिलेगी तथा युवा पीढ़ी अपनी लोक परंपराओं से और अधिक जुड़ सकेगी।

प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री से आग्रह किया कि राज्य सरकार इस ऐतिहासिक मांग पर गंभीरता से विचार करते हुए भोजली पर्व को उसकी गरिमा के अनुरूप सम्मान प्रदान करे। मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए समिति की भावनाओं की सराहना की और मांग पर सकारात्मक पहल का भरोसा दिलाया।
इस दौरान भोजली महोत्सव समिति, तोरवा बिलासपुर के अध्यक्ष शंकर यादव के नेतृत्व में देव यादव, रामजी यादव एवं चंदन यादव सहित समिति के सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि भोजली छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान है और इसे राज्य के विशेष पर्व का दर्जा दिलाने के लिए जनसमर्थन के साथ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।








