विनोद अग्रवाल उर्फ मग्गू सेठ अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर, बढ़ती चिंताएं

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बलरामपुर  – विनोद अग्रवाल उर्फ मग्गू सेठ, जिनके खिलाफ लंबे समय से आपराधिक गतिविधियों और जमीन हड़पने के गंभीर आरोप लग रहे हैं, अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। हाल ही में 06 मई 2025 को थाना राजपुर में दर्ज नई FIR (क्रमांक: 0103) और उनके 15 सालों के आपराधिक इतिहास के बावजूद उनकी गिरफ्तारी न होना स्थानीय लोगों, प्रभावित समुदायों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में गहरी चिंता और नाराजगी पैदा कर रहा है।

वर्तमान स्थिति
नई FIR (क्रमांक: 0103, तारीख: 06/05/2025) में मग्गू सेठ पर जमीन हड़पने और धमकी देने का आरोप लगा है, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र भईरा ने आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसके दबाव में प्रशासन हरकत में आया और भारतीय न्याय दंड संहिता (BNS) की धारा 108 और 3(5) के तहत कार्रवाई शुरू की गई। हालाँकि, मग्गू सेठ अभी भी फरार हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, उनकी तलाश जारी है, लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है।

पिछला आपराधिक रिकॉर्ड
मग्गू सेठ का आपराधिक इतिहास 2009 से 2024 तक फैला हुआ है, जिसमें थाना राजपुर और चौकी बरियों में कई मामले दर्ज हैं। प्रमुख घटनाएँ इस प्रकार हैं:
•  क्रेशर हत्याकांड (मार्च 2022): इस मामले में मग्गू सेठ की संलिप्तता संदिग्ध थी, और जांच में बाधा डालने के आरोप लगे।
•  पहाड़ी कोरवा समुदाय की शिकायत (नवंबर 2024): फर्जी रजिस्ट्री और 14 लाख रुपये के चेक (नंबर 768085, 18.11.24) के जरिए धोखाधड़ी का आरोप, जिसमें कार्रवाई लंबित है।
•  थाना राजपुर के मामले: अपराध क्रमांक 48/09 (मारपीट, बलवा), 133/15 (अपहरण), 40/16, 120/16, और 07/17 (SC/ST उत्पीड़न) सहित 5 प्रकरण और एक प्रतिबंधात्मक कार्यवाही (107/16)।
•  चौकी बरियों के मामले: अपराध क्रमांक 07/120 (बलवा), 32/18, 34/21 (लापरवाही से मृत्यु), और 85/21 (बंधक बनाना) सहित 4 प्रकरण।

जिला बदर की कार्यवाही पर सवाल
स्थानीय लोगों ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि चार-पाँच FIR होने पर आमतौर पर जिला बदर की कार्रवाई हो जाती है, लेकिन मग्गू सेठ के मामले में ऐसा नहीं हुआ। कई गंभीर आपराधिक मामलों के बावजूद जिला बदर की प्रक्रिया शुरू होने के बाद दबा दी गई, जिससे शक गहराया है। लोग openly कह रहे हैं कि मग्गू सेठ के कथित “बोटी नुमा रुपये” (अवैध धन) के दबाव में पुलिस और प्रशासन कार्रवाई से बच रहे हैं।

गिरफ्तारी में देरी के सवाल
मग्गू सेठ की लगातार गिरफ्तारी न होने से कई सवाल उठ रहे हैं। क्या उनके कथित प्रशासनिक प्रभाव और अधिकारियों से सांठगांठ उन्हें सुरक्षा प्रदान कर रही है? स्थानीय लोगों का मानना है कि पुलिस की निष्क्रियता और देरी से अपराधियों को बढ़ावा मिल रहा है। पहाड़ी कोरवा समुदाय और अन्य शिकायतकर्ताओं ने उनकी तत्काल गिरफ्तारी और पुराने मामलों की समीक्षा की मांग की है

ED और कानूनी कार्रवाई की संभावना
मग्गू सेठ की संपत्तियों की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं, जिन्हें Proceeds of Crime माना जा सकता है। Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2022 के तहत, यदि उनकी संपत्तियाँ अपराध से अर्जित साबित होती हैं, तो Enforcement Directorate (ED) उन्हें अटैच कर सकती है। हालाँकि, उनकी गिरफ्तारी के बिना इस दिशा में प्रगति संभव नहीं है। पुलिस और ED की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, लेकिन सबूत जुटाने की प्रक्रिया जारी होने की बात कही जा रही है।

स्थानीय प्रतिक्रिया
पहाड़ी कोरवा समुदाय और स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मग्गू सेठ को तत्काल पकड़ने की मांग की है। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “मग्गू सेठ का आतंक क्षेत्र में बढ़ता जा रहा है। नई FIR और भईरा की आत्महत्या के बाद भी उनकी गिरफ्तारी न होना सिस्टम पर सवाल उठाता है।” क्रेशर हत्याकांड और जमीन हड़पने के मामलों में कार्रवाई की कमी ने जनता में अविश्वास पैदा किया है। भईरा की आत्महत्या के बाद विरोध प्रदर्शन ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

निष्कर्ष
विनोद अग्रवाल उर्फ मग्गू सेठ अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, जो उनके खिलाफ दर्ज नई FIR (क्रमांक: 0103) और पुराने शिकायतों के मद्देनजर बेहद चिंताजनक है। उनकी फरारी, जिला बदर की कार्रवाई में देरी, और कथित प्रशासनिक प्रभाव के चलते स्थानीय समुदायों में असुरक्षा और रोष बढ़ रहा है। अब यह जिला पुलिस और प्रशासन पर निर्भर है कि वे उनकी तलाश को तेज करें, उनकी संपत्तियों की जांच शुरू करें, और न्याय सुनिश्चित करें। क्या मग्गू सेठ कभी पकड़े जाएंगे, यह सवाल अनुत्तरित बना हुआ है।अधिक जानकारी के लिए बने रहें।

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