गौ माता सड़क पर क्यों लावारिस? सरकार गौ-धाम बना रही, मगर ज़मीन पर हाल बेहाल!

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दूध निकालने तक ‘माता’, फिर सड़कों पर मरने के लिए छोड़ दी जाती हैं गौवंश

मुख्यमंत्री साय बोले: गौ संरक्षण के लिए जागरूकता जरूरी, गौशालाओं को बढ़ा अनुदान, प्रदेश में बनेंगे ‘गौ-धाम’रायपुर/छत्तीसगढ़:

गाय हमारी माता है, यह कह देने से ही वह हमारी माता नहीं हो जाती। कोई अपनी मां को सड़क पर नहीं छोड़ता, लेकिन हम दूध निकालने के बाद उन्हीं गायों को सड़कों पर लावारिस छोड़ देते हैं, एक्सीडेंट में मरने के लिए।” – यह सवाल आज छत्तीसगढ़ के हर गांव-शहर में गूंज रहा है।

रायपुर/छत्तीसगढ़:
गाय हमारी माता है, यह कह देने से ही वह हमारी माता नहीं हो जाती। कोई अपनी मां को सड़क पर नहीं छोड़ता, लेकिन हम दूध निकालने के बाद उन्हीं गायों को सड़कों पर लावारिस छोड़ देते हैं, एक्सीडेंट में मरने के लिए।” – यह सवाल आज छत्तीसगढ़ के हर गांव-शहर में गूंज रहा है।

वहीं दूसरी ओर सरकार गौमाता के संरक्षण को लेकर योजनाएं ला रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में गौशालाओं को प्रति मवेशी मिलने वाली अनुदान राशि 25 रुपये से बढ़ाकर 35 रुपये करने की घोषणा की।


जनजागरूकता जरूरी, गौ-धाम तैयार

पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के नव नियुक्त अध्यक्ष विशेषर सिंह पटेल ने पदभार ग्रहण किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा—
“गौ माता में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है, वह हमारी समृद्धि और संस्कृति की प्रतीक हैं। हमें उनके संरक्षण के लिए सामाजिक जागरूकता अभियान चलाना होगा।”

उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने गौ-धाम बनाने का निर्णय लिया है।

  • बेमेतरा के झालम में 50 एकड़ में गौ-धाम तैयार है, जल्द उद्घाटन होगा।
  • कवर्धा में 120 एकड़ में गौ-धाम निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।

गौ-तस्करी और हत्या पर सख्ती

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार गौ-तस्करी और हत्या पर सख्त कार्रवाई करेगी। साथ ही दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और ‘देवभोग’ ब्रांड को मजबूत करने का भी प्रयास हो रहा है।
“गौ अभ्यारण्य अब गौ-धाम कहलाएगा।”


गृह में स्थान देना ज़रूरी: उपमुख्यमंत्री

इस मौके पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा, “गौ माता हमारी कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। अब समय आ गया है कि हम उन्हें घर में स्थान दें, सिर्फ भावना से नहीं, व्यवहार से भी सम्मान दें।”


समाज भी ले जवाबदेही: अब सिर्फ योजनाओं से नहीं चलेगा काम

सरकार जहां योजनाएं बना रही है, वहीं समाज में गौ माता की दशा ज्यों की त्यों बनी हुई है। सड़क पर मवेशी लावारिस घूमते हैं, एक्सीडेंट में मरते हैं, या प्लास्टिक खाकर बीमार हो जाते हैं। सवाल यह है कि हम सब कब अपनी ज़िम्मेदारी समझेंगे?

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