कोरिया। विशेष रिपोर्ट।
कोरिया। भारतीय जनता पार्टी ओबीसी मोर्चा जिला कोरिया के जिलाध्यक्ष कृष्णा प्रजापति इन दिनों अपनी सक्रियता और संगठनात्मक कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। जिलाध्यक्ष का दायित्व संभालने के बाद बीते कुछ ही महीनों में जिला कार्यकारिणी विस्तार, मंडल कार्यकारिणियों के गठन, परिचयात्मक बैठकों, कार्यशालाओं और कार्यकर्ता संवाद जैसे कार्यक्रमों को गति देकर उन्होंने संगठन के भीतर अपनी अलग कार्यशैली की पहचान बनाने का प्रयास किया है।

कृष्णा प्रजापति की कार्यशैली का सबसे प्रमुख पहलू संगठन को कागजों से निकालकर धरातल तक ले जाने और समाज के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने पर केंद्रित नजर आता है। लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण उन्हें विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच काम करने का अनुभव हासिल हुआ है। इसी अनुभव को वे अब भाजपा ओबीसी मोर्चा की जिम्मेदारी के साथ जोड़ते हुए संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
2013 से लगातार सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय
कृष्णा प्रजापति का सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय सफर वर्ष 2013 से निरंतर जारी है। लंबे समय से छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी करने के साथ उन्होंने अलग-अलग स्तरों पर संगठनात्मक जिम्मेदारियां भी निभाई हैं।
ग्रामीण और जमीनी क्षेत्रों में लगातार संपर्क के दौरान उन्हें समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं, अपेक्षाओं और सामाजिक परिस्थितियों को करीब से समझने का अवसर मिला। यही जमीनी अनुभव वर्तमान में उनके संगठनात्मक दायित्व में दिखाई देता है।
उनकी कार्यशैली में क्षेत्रीय संपर्क, कार्यकर्ताओं से संवाद और वास्तविक परिस्थितियों को समझने को विशेष महत्व दिया जाता है।
दायित्व मिलते ही संगठन विस्तार पर फोकस
भाजपा ओबीसी मोर्चा जिला कोरिया के जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद कृष्णा प्रजापति ने संगठन को सक्रिय बनाने की दिशा में तेजी से काम शुरू किया। जिला कार्यकारिणी के विस्तार के साथ-साथ मंडल स्तर पर कार्यकारिणी विस्तार और परिचयात्मक बैठकों को भी प्राथमिकता दी गई।
इन बैठकों का उद्देश्य कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ संगठन की गतिविधियों को निचले स्तर तक मजबूत करना बताया जा रहा है।
उनकी रणनीति में एक ओर अनुभवी कार्यकर्ताओं के अनुभव का उपयोग करने पर जोर है, तो दूसरी ओर नए कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियों से जोड़ने का प्रयास भी दिखाई देता है।
ओबीसी समाज के हर परिवार तक पहुंचने का बड़ा लक्ष्य
कृष्णा प्रजापति ने आने वाले ढाई वर्षों के लिए एक व्यापक लक्ष्य निर्धारित किया है। उनका उद्देश्य कोरिया जिले में निवासरत अन्य पिछड़ा वर्ग समाज के प्रत्येक परिवार तक व्यक्तिगत और संगठनात्मक संपर्क स्थापित करना है।
छत्तीसगढ़ में ओबीसी समाज की विभिन्न जातियों के बीच व्यापक संपर्क अभियान चलाने की दिशा में काम करने की बात कही गई है। उनके अनुसार प्रदेश में ओबीसी समाज की 99 जातियों के बीच संपर्क बढ़ाने की आवश्यकता है और कोरिया जिले में अब तक वे स्वयं 18 जातियों तक पहुंच बनाने का दावा करते हैं।
आने वाले समय में उनका लक्ष्य इस संपर्क को और व्यापक बनाते हुए जिले के अधिक से अधिक परिवारों और सामाजिक समूहों तक पहुंचना है।
सामाजिक संगठन में लंबे अनुभव का मिल रहा लाभ
कृष्णा प्रजापति का सामाजिक क्षेत्र में भी लंबा अनुभव रहा है। ओबीसी महासभा के माध्यम से सामाजिक संगठन के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने सरगुजा संभाग के विभिन्न हिस्सों में कार्यकर्ताओं और सामाजिक लोगों के साथ संपर्क स्थापित किया।
बताया जाता है कि इस दौरान उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों को सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने और संगठनात्मक रूप से सक्रिय करने की दिशा में काम किया। विभिन्न कार्यशालाओं, बैठकों और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में संवाद और जागरूकता बढ़ाने का प्रयास भी किया गया। यही अनुभव अब भाजपा ओबीसी मोर्चा के संगठनात्मक विस्तार में उनके लिए महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।
बैठकों से ज्यादा धरातल पर काम करने की रणनीति
कृष्णा प्रजापति की कार्यशैली की चर्चा करते हुए उनके समर्थक उन्हें ऐसा कार्यकर्ता बताते हैं जो सिर्फ मंच और बैठकों तक सीमित रहने के बजाय जमीनी हकीकत को समझने में विश्वास रखते हैं। उनकी प्राथमिकता क्षेत्र में जाकर लोगों से मिलना, कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनना और समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों तक पहुंचना बताई जाती है।
वे उन लोगों के बीच भी पहुंचने का प्रयास करते हैं, जो आर्थिक या सामाजिक रूप से कमजोर हैं और जिनकी समस्याएं अक्सर बड़े मंचों तक नहीं पहुंच पातीं। इसी वजह से उनकी कार्यशैली को कई लोग ‘शांत लेकिन प्रभावी जमीनी सक्रियता’ के रूप में देखते हैं।
छोटे परिवार से निकले, संघर्ष को बनाया अपनी ताकत
कृष्णा प्रजापति एक साधारण परिवार से आने वाले सामाजिक कार्यकर्ता हैं। सीमित संसाधनों और सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना उनके सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
लंबे समय तक समाज के बीच काम करने के दौरान उन्होंने जमीनी स्तर के लोगों से संपर्क बनाए रखा। यही कारण है कि उनकी कार्यशैली में समाज के जरूरतमंद और उपेक्षित वर्गों तक पहुंचने की विशेष प्राथमिकता दिखाई देती है।
उनके लिए संगठनात्मक जिम्मेदारी केवल पद तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के लोगों के साथ निरंतर संवाद और संपर्क का माध्यम है।
कार्यकर्ता ही संगठन की असली ताकत—इसी सोच के साथ आगे बढ़ने का प्रयास
कृष्णा प्रजापति की संगठनात्मक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कार्यकर्ताओं को मजबूत करना है। उनका मानना है कि किसी भी राजनीतिक संगठन की वास्तविक शक्ति उसके जमीनी कार्यकर्ता होते हैं।
इसी सोच के साथ जिला और मंडल स्तर पर परिचयात्मक बैठकें, कार्यशालाएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित कर कार्यकर्ताओं को एक-दूसरे से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उनका प्रयास है कि संगठन की गतिविधियां केवल जिला मुख्यालय तक सीमित न रहें, बल्कि गांव, वार्ड, मंडल और बूथ स्तर तक सक्रियता दिखाई दे।
आने वाले ढाई साल होंगे संगठनात्मक परीक्षा का समय
कृष्णा प्रजापति के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने निर्धारित लक्ष्य को धरातल पर उतारने की है। आगामी ढाई वर्षों में ओबीसी समाज के अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंच बनाना, विभिन्न जातीय समूहों के साथ संवाद स्थापित करना और संगठन के कार्यकर्ताओं को सक्रिय एवं मजबूत बनाना उनके लिए महत्वपूर्ण लक्ष्य है।
यदि उनका अभियान योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ता है तो आने वाले समय में कोरिया जिले में भाजपा ओबीसी मोर्चा की संगठनात्मक गतिविधियों को और विस्तार मिलने की संभावना है।
पद से ज्यादा काम पर भरोसा, यही बनी पहचान
कृष्णा प्रजापति की अब तक की सक्रियता को उनके समर्थक पद से अधिक काम को प्राथमिकता देने वाली कार्यशैली के रूप में देखते हैं। संगठनात्मक दायित्व मिलने के बाद कम समय में जिला एवं मंडल कार्यकारिणी विस्तार, परिचयात्मक बैठकें और कार्यशालाओं के माध्यम से संगठन को सक्रिय करने की कोशिश इसी दिशा का हिस्सा मानी जा रही है।
सामाजिक क्षेत्र में वर्षों के अनुभव और राजनीतिक संगठन में मिली नई जिम्मेदारी के बीच कृष्णा प्रजापति अब अपने अगले लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं—ओबीसी समाज के प्रत्येक परिवार तक पहुंच, मजबूत कार्यकर्ता नेटवर्क और संगठन को बूथ स्तर तक प्रभावी बनाना।
अब नजर परिणाम पर
कृष्णा प्रजापति के लिए आने वाले ढाई वर्ष केवल संगठनात्मक गतिविधियों का समय नहीं, बल्कि उनकी रणनीति और कार्यशैली की वास्तविक परीक्षा का दौर भी होगा। जिला अध्यक्ष के रूप में उनकी सक्रियता कितनी दूर तक संगठन को मजबूती देती है और ओबीसी समाज के बीच उनका संपर्क अभियान किस स्तर तक पहुंचता है, यह आने वाला समय तय करेगा।
फिलहाल, कोरिया जिले की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में कृष्णा प्रजापति की सक्रिय भूमिका ने यह संकेत जरूर दिया है कि वे शांत अंदाज में, लेकिन लगातार धरातल पर काम करने की रणनीति के साथ अपनी जिम्मेदारी को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।
संगठन मजबूत हो, समाज जुड़े और अंतिम व्यक्ति तक संवाद पहुंचे—इसी लक्ष्य के साथ कृष्णा प्रजापति अपनी राजनीतिक-सामाजिक यात्रा के अगले चरण की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं।









