रायपुर: छत्तीसगढ़ में सेवामुक्त बी.एड. प्रशिक्षित सहायक शिक्षकों ने अपनी बहाली और समायोजन की मांग को लेकर संघर्ष तेज कर दिया है। पिछले तीन महीनों से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे इन शिक्षकों को जब कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला, तो उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मंत्रिमंडल के सदस्यों को अपने खून से पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई।
धरना स्थल पर सैकड़ों शिक्षक डटे, अनूठे विरोध से सरकार को घेरा
रायपुर के तूता धरना स्थल पर सैकड़ों शिक्षक अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं। शिक्षकों ने सरकार को जगाने के लिए ‘अनुनय यात्रा’, ‘जल सत्याग्रह’, ‘मुंडन’, ‘दंडवत प्रणाम’ और ‘सामूहिक भूख हड़ताल’ जैसे कई अनूठे विरोध प्रदर्शन किए।
संघर्ष की प्रमुख झलकियां:
- अनुनय यात्रा: सरगुजा से रायपुर तक 350 किलोमीटर पैदल यात्रा।
- जल सत्याग्रह: घंटों ठंडे पानी में खड़े रहकर विरोध प्रदर्शन।
- मुंडन: 50 शिक्षकों ने बाल मुंडवाकर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाई।
- दंडवत प्रणाम: आदिवासी महिला शिक्षकों ने विधानसभा के सामने दंडवत प्रणाम किया।
- भूख हड़ताल: लगातार कई दिनों तक भोजन त्यागकर अपना दर्द जाहिर किया।
क्या है मामला?
सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त 2023 को आदेश दिया कि बी.एड. प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां केवल 11 अगस्त 2023 तक ही मान्य होंगी। इसके बाद डी.एड. अभ्यर्थियों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की और बी.एड. शिक्षकों की नियुक्ति को चुनौती दी।
10 दिसंबर 2024 को हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि प्राथमिक विद्यालयों में केवल डी.एड. प्रशिक्षित शिक्षकों को नियुक्त किया जाएगा, जिससे हजारों बी.एड. सहायक शिक्षकों की सेवाएं समाप्त हो गईं।
शिक्षकों का कहना है कि सरकार ने भर्ती विज्ञापन में दोनों योग्यताओं को मान्यता दी थी, फिर अब बी.एड. शिक्षकों को बाहर करना अन्यायपूर्ण है। 14 महीने सेवाएं देने के बाद अचानक सेवा समाप्ति से वे भारी आर्थिक संकट में फंस गए हैं।
‘भविष्य अंधकारमय, मानसिक तनाव बढ़ा’
कोंडागांव जिले के सरकारी प्राथमिक स्कूल में सहायक शिक्षक रहे सुमित बोरकर ने बताया कि ”तीन महीने से सैलरी नहीं मिल रही, जमा पूंजी खत्म हो चुकी है। मानसिक तनाव इतना बढ़ गया है कि अब धरना स्थल तक आना-जाना भी मुश्किल हो रहा है।”
शिक्षकों का कहना है कि यदि सरकार जल्द समायोजन की प्रक्रिया शुरू नहीं करती, तो वे आंदोलन को और अधिक तीव्र करेंगे।
शिक्षकों की मांग:
- बी.एड. प्रशिक्षित सहायक शिक्षकों का समायोजन किया जाए।
- सेवामुक्त शिक्षकों को फिर से बहाल किया जाए।
- सरकार त्वरित निर्णय लेकर उनका भविष्य सुरक्षित करे।
निष्कर्ष: बर्खास्त सहायक शिक्षक सरकार से जल्द फैसले की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अगर समायोजन की प्रक्रिया जल्द शुरू नहीं हुई, तो यह आंदोलन और व्यापक हो सकता है। सरकार पर बढ़ते दबाव के बीच देखना होगा कि शिक्षकों की यह लड़ाई कब तक जारी रहती है।









