नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने भारत राष्ट्र समिति (BRS) से कांग्रेस में शामिल हुए 7 विधायकों की अयोग्यता को लेकर तेलंगाना सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने इस मामले में तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि विधानसभा अध्यक्ष विधायकों की अयोग्यता से जुड़ी याचिकाओं पर निर्णय लेने में देरी कर रहे हैं।
मंगलवार (4 मार्च) को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। इसके बाद अदालत ने तेलंगाना सरकार, विधानसभा और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी।
बीआरएस ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका
बीआरएस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की है कि तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष को विधायकों की अयोग्यता पर जल्द फैसला लेने का निर्देश दिया जाए। पार्टी का कहना है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में बीआरएस के टिकट पर चुनाव जीतने वाले 7 विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए थे, लेकिन उनके खिलाफ दायर अयोग्यता याचिका पर अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ।
कोर्ट ने मांगा जवाब, पहले भी टल चुकी है सुनवाई
बीते 10 फरवरी को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और शेखर नाफड़े से पूछा था कि अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में कितना समय लगेगा। हालांकि, 18 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई न्यायाधीशों के व्यस्त होने के कारण 4 मार्च तक टाल दी गई थी।
किन 7 विधायकों की अयोग्यता का मामला कोर्ट में?
बीआरएस ने जिन 7 विधायकों की अयोग्यता की मांग की है, वे हैं:
✅ श्रीनिवास रेड्डी परिगी
✅ बंदला कृष्ण मोहन रेड्डी
✅ काले यादैया
✅ टी. प्रकाश गौड़
✅ ए. गांधी
✅ गुडेम महिपाल रेड्डी
✅ एम. संजय कुमार
इन विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद बीआरएस ने उनके खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग की थी। अब सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद इस मामले में तेलंगाना सरकार और विधानसभा अध्यक्ष को अपना पक्ष रखना होगा।
🚨 अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी, जिसमें अदालत आगे का निर्णय ले सकती है।









