नई दिल्ली: कपड़ा उद्योग दुनिया में सबसे बड़े प्रदूषकों में से एक बन चुका है। एक साधारण सूती शर्ट के निर्माण में 2,700 लीटर पानी खर्च होता है, लेकिन जब ये कपड़े कचरे में डाल दिए जाते हैं, तो ये और भी ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। रिसर्च के मुताबिक, लैंडफिल में डाले गए कपड़ों को सड़ने में 200 से अधिक साल लग सकते हैं, जिससे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है। इस गंभीर मुद्दे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ‘मन की बात’ में उठाया, जिससे यह बहस का प्रमुख विषय बन गया है।
भारत में टेक्सटाइल वेस्ट की विकराल स्थिति
भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा टेक्सटाइल वेस्ट उत्पादक देश है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि देश में सिर्फ 1% से भी कम टेक्सटाइल वेस्ट को पुनः उपयोग (रीसाइकिल) किया जाता है। इसका मतलब यह है कि हर साल लाखों टन कपड़ा कचरे के रूप में लैंडफिल साइट्स पर पहुंच जाता है, जिससे न केवल प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों की भी बर्बादी होती है।
टेक्सटाइल वेस्ट का पर्यावरण पर प्रभाव
- ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन – कपड़े सड़ने के दौरान मीथेन गैस छोड़ते हैं, जो जलवायु परिवर्तन में योगदान देता है।
- जल प्रदूषण – कपड़ों में इस्तेमाल होने वाले रंग और रसायन भूजल को दूषित करते हैं।
- भूमि प्रदूषण – लैंडफिल में कपड़ों के ढेर से जमीन की उर्वरता घटती है और जैव विविधता पर असर पड़ता है।
क्या है समाधान?
- टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना – पुराने कपड़ों को रिसाइक्लिंग सेंटर तक पहुंचाना और पुनः उपयोग करना।
- जागरूकता बढ़ाना – उपभोक्ताओं को कम कपड़े खरीदने और टिकाऊ फैशन अपनाने के लिए प्रेरित करना।
- दान और पुनः उपयोग – कपड़ों को कचरे में फेंकने की बजाय जरूरतमंदों तक पहुंचाना।
- नवाचार को अपनाना – टेक्सटाइल वेस्ट से स्टेशनरी, फर्नीचर, खिलौने, बैग आदि का निर्माण करना।
भारत में टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग की मौजूदा पहल
हरियाणा का पानीपत शहर ग्लोबल टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग हब के रूप में उभर रहा है। वहीं, बेंगलुरु और तमिलनाडु में भी कई स्टार्टअप पुराने कपड़ों को नए उत्पादों में बदलने का काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में टेक्सटाइल वेस्ट मैनेजमेंट को बड़े पैमाने पर लागू करने की जरूरत पर जोर दिया है।
निष्कर्ष
टेक्सटाइल वेस्ट एक बढ़ती हुई चुनौती है, लेकिन सही कदम उठाकर इसे अवसर में बदला जा सकता है। टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग न केवल पर्यावरण को सुरक्षित रखेगा, बल्कि नए रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगा। अब समय आ गया है कि हम अपने पुराने कपड़ों का सही प्रबंधन करें और सतत विकास की दिशा में कदम बढ़ाएं।









