पहाड़ों के बीच हुआ खूनखराबा — देश पूछ रहा है जवाब
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में जो कुछ हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर दिया है। सेना की वर्दी में आए 4 से 7 आतंकियों ने 27 मासूम जिंदगियों को खत्म कर दिया और फरार हो गए। घाटी लहूलुहान है, और देश सदमे में। भारतीय सेना अब भी उनकी तलाश में जुटी है। लेकिन इससे कहीं बड़ा सवाल देश के हर नागरिक के दिल में उठ रहा है — क्या इन 27 मौतों का बदला लिया जाएगा?
भारत का गुस्सा सीधे पाकिस्तान की ओर है, जिसे इस नरसंहार के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक हर जगह एक ही बात गूंज रही है — “कब मिलेगा इंसाफ?”
ये हैं वो 8 सवाल जो हर भारतीय पूछ रहा है
- कितनी और कैसी तैयारी करके आए थे आतंकी?
- क्या वे LOC पार करके आए या लोकल नेटवर्क की मदद से घुसे?
- हमले के बाद कहां गायब हो गए आतंकी?
- इतनी बड़ी वारदात के बाद फरारी कैसे संभव हुई?
- आतंकियों को सबसे पहले किसने देखा था?
- पहला अलर्ट किसने दिया और उस पर क्या ऐक्शन लिया गया?
- आतंकियों की आखिरी लोकेशन क्या थी?
- क्या ड्रोन या सैटेलाइट से उनका ट्रैक मिला?
- क्या ये हमला सुरक्षा में चूक का नतीजा था?
- अगर हां, तो जिम्मेदार कौन?
- कश्मीर में टूरिस्टों की सुरक्षा किसके भरोसे?
- पर्यटन सीजन में सुरक्षा क्यों कमजोर रही?
- क्या बैसरन घाटी जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा बल कम थे?
- संवेदनशील इलाकों में तैनाती क्यों नहीं बढ़ाई गई?
- हमले के अलर्ट को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया?
- क्या इंटेलिजेंस फेलियर फिर से दोहराया गया?
सरकार और सेना की अग्निपरीक्षा
अब निगाहें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय सेना पर हैं। सवाल सिर्फ बदले का नहीं, जवाबदेही का भी है। क्या 27 मौतें सिर्फ एक आंकड़ा बनकर रह जाएंगी? क्या फिर से एक फाइल खुलेगी और धीरे-धीरे बंद हो जाएगी?
इस हमले ने सिर्फ इंसान नहीं मारे, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान भी लगा दिया है। अब वक्त है उस जवाब का, जो सिर्फ गोलियों से नहीं — रणनीति, संकल्प और कार्रवाई से मिले।









