हर घंटे बन रही 12 मेगावाट बिजली, 700 टन प्रतिदिन कचरे का हो रहा उपयोग
जयपुर। कभी शहर की सबसे बड़ी समस्या माने जाने वाला ठोस कचरा अब जयपुर की ऊर्जा का नया स्रोत बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय मदर अर्थ डे के अवसर पर जयपुर के लांगड़ियावास स्थित वेस्ट टू एनर्जी प्लांट पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक उदाहरण बनकर उभरा है। यहां हर घंटे 12 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिससे हर महीने 51 हजार से ज्यादा घरों को रोशन किया जा सकता है।
आधुनिक तकनीक और इच्छाशक्ति का कमाल
जयपुर नगर निगम हेरिटेज और ग्रेटर की पहल पर जिंदल अर्बन वेस्ट मैनेजमेंट के सहयोग से बने इस प्लांट में 700 टन प्रतिदिन कचरा डिस्पोज हो रहा है। इस प्रक्रिया में न केवल कचरे का निपटान हो रहा है बल्कि उससे 7684 मेगावाट बिजली प्रति माह तैयार हो रही है। अनुमान के मुताबिक, एक घर औसतन 150 यूनिट बिजली उपयोग करता है, ऐसे में यह बिजली 51,227 घरों के लिए पर्याप्त है।
वेस्ट से बिजली बनाने की प्रक्रिया
प्लांट में सबसे पहले नगर निगम से आए कचरे को एमएसडब्ल्यू पिट में संग्रहित किया जाता है जिसकी क्षमता 12,000 टन है। इस कचरे को 7 दिन तक सुखाया जाता है और फिर ग्रैब एंड क्रेन की सहायता से बॉयलर में ट्रांसफर किया जाता है। यहां इसे 400 डिग्री सेल्सियस पर जलाया जाता है, जिससे निकलने वाली स्टीम को टरबाइन पर भेजकर बिजली बनाई जाती है। यह बिजली जमवारामगढ़ सब स्टेशन के माध्यम से ट्रांसफर की जाती है।
पर्यावरण संरक्षण में बहुमुखी योगदान
प्लांट में हर स्तर पर पर्यावरणीय मानकों का ध्यान रखा गया है:
- कचरा जलाने से निकलने वाली राख का उपयोग लैंडफिल और भविष्य में ईंट निर्माण में किया जाएगा।
- प्लांट परिसर के 33.33% हिस्से में वृक्षारोपण किया जा रहा है।
- दूषित जल को लीचेट ट्रीटमेंट प्लांट में शुद्ध कर दोबारा उपयोग किया जाता है।
- धुएं को फ्लू गैस क्लीनिंग सिस्टम से शुद्ध कर बाहर निकाला जाता है, जिससे जीरो लिक्विड डिस्चार्ज नीति का पालन होता है।
निगम की बड़ी भूमिका
जयपुर नगर निगम हेरिटेज और ग्रेटर द्वारा डोर टू डोर कलेक्शन के तहत इस प्लांट में कचरा भेजा जाता है। निगम जिंदल ग्रुप से ₹66 प्रति टन की दर से शुल्क ले रहा है, जिससे निगम को सालाना लगभग ₹2.5 करोड़ की आय होगी। इस प्लांट के संचालन से भविष्य में डंप यार्ड्स की संख्या में कमी आएगी और शहर साफ-सुथरा बनेगा।
योजना की सफलता में जनता की भागीदारी अहम
प्लांट के एचआर हेड मनीष के अनुसार, इसकी शुरुआत 20 फरवरी 2025 को हुई थी और तब से लगातार बिजली उत्पादन हो रहा है। उन्होंने अपील की कि नागरिक घर से ही सूखा और गीला कचरा अलग करें ताकि प्लांट में सेग्रीगेशन प्रक्रिया में समय और संसाधनों की बचत हो सके। यह प्लांट राज्य सरकार और केंद्र की स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत स्थापित किया गया है।
निष्कर्ष
जयपुर का वेस्ट टू एनर्जी प्लांट न केवल तकनीकी और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है। यदि यही मॉडल प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी अपनाया जाए, तो राजस्थान ऊर्जा उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के क्षेत्रों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।









