भिलाई-चरौदा में प्रदेश स्तरीय बैठक में बनी रणनीति, बस्तर के कारीगरों ने बताई अपनी पीड़ा; गांव-गांव तक अभियान पहुंचाने का संकल्प
भिलाई-चरौदा, 20 सितंबर।
पीढ़ियों से अपने हुनर और हाथों की कला के दम पर छत्तीसगढ़ की पहचान गढ़ रहे पारंपरिक कारीगर अब अपने अधिकार, सम्मान और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए संगठित होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। केंद्र में कारीगर मंत्रालय की स्थापना की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ में गतिविधियां तेज करने तथा प्रदेश स्तर पर राज्य एक्शन काउंसिल (SAC) के गठन को लेकर रविवार को भिलाई-चरौदा में महत्वपूर्ण प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित हुई।
पंचशील नगर (पश्चिम), चरौदा-भिलाई में आयोजित इस बैठक में बस्तर संभाग सहित विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे पारंपरिक कारीगरों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में कारीगर समाज की मौजूदा चुनौतियों, उनके अधिकारों, सरकारी योजनाओं तक पहुंच, प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक, बाजार व्यवस्था और आर्थिक अवसरों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
हुनर है, लेकिन बाजार और संसाधनों की कमी बड़ी चुनौती
बैठक में बस्तर क्षेत्र से आए कारीगरों ने अपनी जमीनी समस्याओं को प्रमुखता से रखा। प्रतिनिधियों ने बताया कि पारंपरिक लौहकला, मिट्टी कला, बाँस शिल्प और अन्य हस्तकलाओं से जुड़े अनेक परिवार आज भी अपने पारंपरिक हुनर के बावजूद पर्याप्त बाजार, आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं की जानकारी के अभाव में आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
कारीगर प्रतिनिधियों का कहना था कि हाथों का हुनर केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोककला, संस्कृति और परंपरा की पहचान भी है। यदि कारीगरों को बेहतर प्रशिक्षण, बाजार और संस्थागत सहयोग मिले तो पारंपरिक शिल्प को नई दिशा मिलने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
‘अलग मंत्रालय’ से उम्मीद, सम्मान और पहचान की मांग
बैठक में कारीगर मंत्रालय की स्थापना के प्रस्ताव को लेकर संभावित लाभों पर भी चर्चा हुई। उपस्थित प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि कारीगरों के लिए विशेष स्तर पर काम करने वाली व्यवस्था बनने से उनकी समस्याओं को नीति निर्माण के स्तर पर बेहतर तरीके से उठाया जा सकेगा।
कारीगर समाज की ओर से सम्मान, पहचान, प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक, बाजार और आर्थिक अवसरों को प्रमुख जरूरतों के रूप में सामने रखा गया।
व्ही. विश्वनाथन आचारी ने दिया एकजुटता का संदेश
बैठक के मुख्य अतिथि श्री व्ही. विश्वनाथन आचारी ने कारीगर समाज से अपने अधिकारों और विकास के लिए संगठित होकर सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ में राज्य एक्शन काउंसिल (SAC) को मजबूत बनाने और कारीगरों से जुड़े मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि कारीगर समाज की आवाज को मजबूती देने के लिए संगठनात्मक एकजुटता और निरंतर जनजागरण जरूरी है।
बस्तर से प्रदेशभर तक पहुंचेगी आवाज
बैठक में श्री व्ही. विश्वनाथन आचारी, श्री नीलम चिन्ना केसवालू, श्री राजेश तामकार, श्री कृष्ण प्रजापति, श्रीमती सुचित्रा शर्मा, डॉ. अमरनाथ शर्मा, श्रीमती अजीत एक्का, श्री बरतूराम विश्वकर्मा, श्री मकालिगा, श्री सजीत विश्वकर्मा एवं श्री जे.के. विश्वकर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

बैठक के अंत में यह संकल्प लिया गया कि बस्तर संभाग से लेकर पूरे छत्तीसगढ़ तक पारंपरिक कारीगरों को एकजुट करने का अभियान तेज किया जाएगा। कारीगर मंत्रालय की स्थापना की मांग को लेकर चलाए जा रहे अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने तथा कारीगर समाज के अधिकार, सम्मान और आर्थिक सशक्तीकरण को लेकर व्यापक जनजागरण अभियान चलाने पर जोर दिया गया।

हुनर को पहचान, कारीगर को सम्मान—इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ेगा अभियान
बैठक में उठी आवाज केवल एक मांग तक सीमित नहीं रही, बल्कि पारंपरिक कारीगरों की समस्याओं को संगठित तरीके से सामने लाने और उनके भविष्य को लेकर व्यापक पहल की जरूरत पर केंद्रित रही। अब नजर इस बात पर होगी कि राज्य एक्शन काउंसिल के गठन के बाद यह अभियान किस तरह प्रदेश के अलग-अलग जिलों और कारीगर समुदायों तक पहुंचता है।









