जांजगीर-चांपा। पार्थों चक्रवर्ती विशेष रिपोर्ट।
पंचायत की कमान संभालने के पीछे स्पष्ट उद्देश्य—गांव में शिक्षा का स्तर बढ़ाना और बच्चों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना, बाजार व व्यवसायिक परिसर से पंचायत को मिल रही आय से स्थानीय गतिविधियों को बढ़ावा
जांजगीर-चांपा। ग्राम पंचायत गोर के सरपंच ने VACHANNEWS टीम से विशेष बातचीत में पंचायत के विकास, शिक्षा व्यवस्था और स्थानीय आय के स्रोतों को लेकर अपनी प्राथमिकताओं की जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरपंच बनने के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य केवल पंचायत का प्रशासन चलाना नहीं, बल्कि गांव के बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाना और शिक्षा के स्तर को लगातार ऊपर उठाना है।
सरपंच ने कहा कि किसी भी गांव की असली ताकत उसके बच्चे और युवा होते हैं। यदि बच्चों को अच्छी शिक्षा, सही मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के अवसर मिलें, तो गांव का भविष्य भी मजबूत होता है। इसी सोच के साथ वे ग्राम पंचायत में शिक्षा को विशेष प्राथमिकता देने की दिशा में कार्य करना चाहते हैं।
बच्चों की शिक्षा और विकास पर विशेष जोर
उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत गोर के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि उन्हें बेहतर शैक्षणिक माहौल, प्रोत्साहन और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें। पंचायत स्तर पर शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाना और बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रेरित करना उनके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
सरपंच का मानना है कि सिर्फ स्कूल तक बच्चों की पहुंच सुनिश्चित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके शिक्षा स्तर में वास्तविक सुधार लाना भी उतना ही जरूरी है। इसके लिए पंचायत और ग्रामीण समाज को मिलकर सकारात्मक वातावरण तैयार करना होगा।
उन्होंने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि गांव के बच्चे शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ें, उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित हों और भविष्य में अपने गांव एवं क्षेत्र का नाम रोशन करें।
पंचायत की आय में बाजार और व्यवसायिक परिसर की महत्वपूर्ण भूमिका
बातचीत के दौरान सरपंच ने ग्राम पंचायत की आर्थिक गतिविधियों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत गोर की आय का एक प्रमुख माध्यम बाजार और व्यवसायिक परिसर है। पंचायत क्षेत्र में संचालित इन गतिविधियों से पंचायत को आय प्राप्त होती है, जिसका उपयोग स्थानीय स्तर पर विभिन्न आवश्यकताओं और विकास कार्यों में सहयोग के लिए किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि बाजार और व्यवसायिक परिसर की मौजूदगी से छोटे स्तर पर काम करने वाले स्थानीय लोगों और व्यवसायियों को भी अवसर मिलता है। इससे ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और लोगों को अपने स्तर पर रोजगार एवं व्यवसाय से जुड़ने में मदद मिलती है।
शिक्षा के साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की सोच
ग्राम पंचायत गोर के सरपंच की प्राथमिकताओं में एक ओर जहां बच्चों की शिक्षा और भविष्य को केंद्र में रखा गया है, वहीं दूसरी ओर पंचायत की आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने की दिशा में भी प्रयास दिखाई देता है। उनका मानना है कि शिक्षा और आर्थिक मजबूती, दोनों गांव के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
यदि गांव के बच्चे बेहतर शिक्षा प्राप्त करेंगे और स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार एवं व्यवसाय के अवसर मिलेंगे, तो इससे ग्राम पंचायत की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को मजबूती मिल सकती है।
“बच्चों का विकास ही गांव का विकास”
सरपंच ने बातचीत में शिक्षा को लेकर अपनी सोच को स्पष्ट करते हुए कहा कि गांव का विकास केवल सड़क, नाली और भवनों के निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए। वास्तविक विकास तब माना जाएगा, जब गांव के बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ें और युवाओं को अपने भविष्य के लिए बेहतर अवसर मिलें।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायत गोर में शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात सरपंच ने कही है। उनका कहना है कि आने वाले समय में पंचायत के बच्चों और युवाओं के लिए बेहतर वातावरण तैयार करना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में रहेगा।
ग्राम पंचायत गोर के सरपंच की यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि गांव के विकास की मजबूत नींव केवल भौतिक सुविधाओं से नहीं, बल्कि शिक्षा, जागरूकता और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के विकास से भी तैयार होती है।
VACHANNEWS टीम से बातचीत में सरपंच ने शिक्षा को पंचायत के भविष्य की दिशा और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का आधार बताते हुए इसे अपनी प्राथमिकता बताया।







