लकड़ी के सहारे टिका भवन, विभाग की अनदेखी से नहीं मिल रही राहत

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जर्जर छात्रावास में खतरे के साये में जी रहे आदिवासी मासूम

कोरबा पाली : सरकारें आदिवासी बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और समुचित विकास के लिए भले ही करोड़ों की योजनाएं चला रही हों, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। पाली विकासखंड के ग्राम पंचायत जेमरा में संचालित प्राथमिक आदिवासी बालक छात्रावास की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि यहां रहना बच्चों के लिए रोज़ मौत को न्योता देने जैसा हो गया है।

करीब 10 साल पहले बना यह 50 सीटर छात्रावास अब खंडहर में तब्दील हो चुका है। भवन की दीवारों में गहरी दरारें, छत से झड़ता प्लास्टर, उखड़े हुए टाइल्स और लकड़ी के सहारे टिके बरामदे – सब मिलकर यह दर्शाते हैं कि यह भवन कभी भी गिर सकता है। बारिश के दिनों में पानी कमरे के अंदर भर जाता है और खुले खिड़की-दरवाजों के कारण साँप-बिच्छू जैसे ज़हरीले जीवों का खतरा हर पल बना रहता है।

छात्रावास अधीक्षक खुद इसी भवन में रहने को मजबूर हैं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। इस सत्र में छात्रावास में पढ़ाई के लिए 5–7 बच्चों के आवेदन आए थे, लेकिन भवन की हालत देखकर अभिभावकों ने बच्चों को यहां भेजने से इनकार कर दिया।

पूर्व सरपंच भंवरसिंह उइके ने बताया कि उन्होंने कई बार कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन देकर नया भवन या मौजूदा की मरम्मत की मांग की, जिसके बाद आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त को निर्देश दिए गए। बावजूद इसके अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

हाल ही में भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में जेमरा पहुंचे जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह को जब ग्रामीणों ने छात्रावास की दयनीय स्थिति से अवगत कराया तो उन्होंने मौके पर जाकर स्थिति देखी और आदिम जाति कल्याण विभाग के अफसरों पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होगा, शायद विभाग जागेगा भी नहीं।

डॉ. सिंह ने कहा कि अनुसूचित जनजातीय बच्चों के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का मकसद शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण बच्चे उन योजनाओं से वंचित रह रहे हैं। उन्होंने मामले को कलेक्टर के संज्ञान में लाकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों की मांगें:

मौजूदा भवन को तत्काल खाली कराया जाए

नया छात्रावास शीघ्र स्वीकृत कर निर्माण कराया जाए

बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की जाए

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