नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में एक हफ्ते तक चले हंगामे के बाद आज सोमवार को ऑपरेशन सिंदूर और 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर बहुप्रतीक्षित बहस शुरू होने जा रही है। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा होगी, जिसमें सत्तापक्ष और विपक्ष के दिग्गज नेता आमने-सामने होंगे।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर चर्चा में हिस्सा लेंगे। वहीं, विपक्ष की ओर से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई वरिष्ठ नेता सरकार को घेरने की रणनीति के साथ मैदान में उतरेंगे।
विपक्ष का आरोप है कि 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हुई थी, वह खुफिया तंत्र की गंभीर विफलता का परिणाम था। साथ ही, विपक्ष ने केंद्र सरकार की विदेश नीति को भी कठघरे में खड़ा किया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान का भी हवाला दिया है, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि लोकसभा में सोमवार को ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले पर 16 घंटे लंबी बहस होगी और इसके एक दिन बाद यही बहस राज्यसभा में होगी। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस ने हमले के तुरंत बाद दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी।
रमेश ने यह भी कहा कि 22 अप्रैल के हमले में शामिल आतंकियों को अभी तक न्याय के कटघरे में नहीं लाया गया है और वे पुंछ (दिसंबर 2023), गंगागीर और गुलमर्ग (अक्टूबर 2024) हमलों में भी संलिप्त बताए जाते हैं। उन्होंने 24 अप्रैल को हुई सर्वदलीय बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री को करनी थी, लेकिन यह जिम्मेदारी रक्षा मंत्री ने निभाई।
गौरतलब है कि 14 जुलाई, 2025 को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी सार्वजनिक रूप से पहलगाम हमले को सुरक्षा तंत्र की विफलता करार दिया था।










