कोरबी पंचायत में भ्रष्टाचार चरम पर, विकास कार्यों का अता-पता नहीं – ग्रामीण बोले, नाली और कक्ष ढूंढने दूरबीन भी बेअसर!

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सरकारी फाइलों में निर्माण पूरा, जमीन पर कुछ भी नहीं – 3.54 लाख की योजनाएं रहस्यमय ढंग से ‘गायब’

कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा: कोरबी (सी) पंचायत में भ्रष्टाचार का ऐसा नमूना सामने आया है जिसे सुनकर फिल्म ‘वेलडन अम्मा’ की कहानी याद आ जाए। उस फिल्म में जिस तरह कागजों में कुआं बन जाता है लेकिन हकीकत में कहीं नजर नहीं आता – वैसा ही मामला ग्राम पंचायत कोरबी (सी) में देखने को मिला है, जहां करीब 3.54 लाख रुपये खर्च कर प्राथमिक शाला में अतिरिक्त कक्ष की मरम्मत और नाली निर्माण दिखाया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत शून्य है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत ने न तो कोई नाली बनवाई और न ही स्कूल में अतिरिक्त कक्ष की मरम्मत करवाई। ये सब केवल कागजों पर हुआ और सरकारी राशि की जमकर बंदरबांट की गई। ग्रामीण तंज कसते हुए कह रहे हैं कि “दूरबीन लेकर भी खोजें तो नाली और कक्ष नहीं मिलते।”

सालों से जारी भ्रष्टाचार, जिम्मेदार आंख मूंदे बैठे

वर्ष 2014-15 में कोरबी (सी) का गठन हुआ और तभी से पदस्थ सचिव मेहरून निशा पर ग्रामीण लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगाते आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इनके कार्यकाल में पूर्व सरपंच पुनिता कंवर के साथ मिलकर योजनाओं में भारी अनियमितताएं की गईं।

5 वर्षों में पेयजल व्यवस्था सुधारने के नाम पर 15वें वित्त आयोग से 18 लाख 68 हजार रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन आज भी ग्रामीणों को पीने का शुद्ध पानी नहीं मिल रहा। वहीं 3 लाख 54 हजार 880 रुपये की राशि नाली निर्माण और स्कूल मरम्मत के नाम पर फर्जी तरीके से निकाली गई।

कागजों में खर्च, धरातल पर शून्य

रिचार्ज बाउचर के अनुसार:

01/10/2022: नाली निर्माण – ₹60,000

21/12/2022: स्कूल मरम्मत – ₹80,000

17/02/2023: नाली व स्कूल मरम्मत – ₹1,30,000

26/12/2024: नाली निर्माण – ₹78,880

04/03/2023: नाली मरम्मत (मूलभूत मद) – ₹10,000


लेकिन इन कार्यों का कोई अता-पता नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि पूरे पंचायत में न तो कोई नाली बनी है, न ही स्कूल में कोई अतिरिक्त कक्ष।

क्या उप अभियंता और एसडीओ भी मिले हुए थे?

नियमों के अनुसार 49 हजार रुपये से अधिक के कार्यों के लिए उप अभियंता द्वारा मूल्यांकन और एसडीओ द्वारा सीसी जारी किया जाता है। जब कार्य हुआ ही नहीं, तो किस आधार पर राशि निकाली गई? कैसे ऑडिट में सब ‘ठीक’ पाया गया? यह बड़ा सवाल है।

ग्रामीणों की तैयारी – कलेक्टर से शिकायत

अब ग्रामीण पूरे मामले की शिकायत लेकर कलेक्टर के पास जाने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि जांच हो तो और घोटाले सामने आएंगे। ग्रामीण यह भी आरोप लगा रहे हैं कि शासकीय भवनों की मरम्मत और रंग-रोगन के नाम पर भी लाखों रुपये का फर्जी खर्च दिखाया गया है, जिसकी परतें जल्द खुलेंगी।

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