प्रदेश के 10 आदिवासी बहुल जिलों में पीडीएस चावल घोटाला, 128 करोड़ का अनाज काले बाजार में बेचने का खुलासा

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प्रदेश के आदिवासी बहुल 10 जिलों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के चावल में बड़े पैमाने पर घोटाला उजागर हुआ है। विधानसभा में तारांकित प्रश्न क्रमांक 58 के जवाब में खाद्य विभाग की रिपोर्ट ने खुलासा किया कि 4,63,319 टन चावल, जिसकी कीमत 128.09 करोड़ रुपये है, को काले बाजार में बेचा गया।

विधानसभा जांच समिति अब इस रिपोर्ट की समीक्षा कर आगे की कार्रवाई तय करेगी। समिति के सदस्यों ने सवाल उठाया कि राशन दुकानों का स्टॉक संचालनालय को भेजने के बाद भी ‘बचत स्टॉक’ क्यों नहीं घटाया गया। एनआईसी ने तकनीकी गड़बड़ी का हवाला देकर सामान्य जिलों के करीब 400 करोड़ रुपये के चावल का समायोजन कर दिया, लेकिन आदिवासी जिलों में यह राहत नहीं दी गई, क्योंकि यहां के अधिकारियों ने कोई ‘विकल्प’ नहीं अपनाया।

खाद्य विभाग की जांच में सामने आया कि 298 राशन दुकानों ने वितरण में भारी अनियमितताएं कीं। इनमें से 50 दुकानें निलंबित, 31 निरस्त और 31 दुकानों को राजस्व वसूली नोटिस जारी किया गया। केवल 112 दुकानों पर ठोस कार्रवाई हुई, जबकि बाकी दुकानदारों ने खुले बाजार से चावल खरीदकर सरकारी स्टॉक पूरा कर लिया और रिकॉर्ड में गड़बड़ी छिपा ली।

जिलावार आंकड़ों में सबसे ज्यादा गड़बड़ी कोरबा में पाई गई, जहां 37,276 क्विंटल चावल का अवैध लेन-देन कर 16.59 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके बाद सरगुजा में 36,781 क्विंटल (15.31 करोड़), बलरामपुर में 40,026 क्विंटल (14.22 करोड़), बस्तर में (13.24 करोड़), सूरजपुर में (13.06 करोड़), कांकेर में (12.73 करोड़), कवर्धा में (12.31 करोड़), सक्ति में (11.59 करोड़), जशपुर में (11.08 करोड़) और बिलासपुर में (7.96 करोड़) का चावल गायब पाया गया।

खाद्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि यह गड़बड़ी संगठित रूप से की गई और कई मामलों में दुकानदारों ने कार्रवाई से बचने के लिए खुले बाजार से चावल खरीदकर स्टॉक पूरा किया। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हुई, तो यह एक बड़े घोटाले के रूप में सामने आ सकता है।

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