राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक जरूरतों के नाम पर सरकार का बड़ा फैसला
नई दिल्ली। देश में अब परमाणु, जरूरी (Critical) और रणनीतिक खनिजों की खदानों को पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) दिलाने के लिए जनता की राय (Public Consultation) लेना जरूरी नहीं होगा। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इन खनिज प्रोजेक्ट्स को सार्वजनिक परामर्श से छूट दे दी है।
मंत्रालय का कहना है कि यह कदम ‘देश की रक्षा और सुरक्षा’ से जुड़े कारणों और रणनीतिक जरूरतों को देखते हुए उठाया गया है। इस फैसले से अब ऐसे खनिजों के खनन को मंजूरी देने की प्रक्रिया तेज होगी और प्रोजेक्ट्स का काम जल्दी शुरू हो सकेगा।
क्या है सार्वजनिक परामर्श?
सार्वजनिक परामर्श (Public Consultation) EIA (Environmental Impact Assessment) की एक अहम प्रक्रिया है।
🔹 इसके तहत किसी भी विकास (Development) या औद्योगिक (Industrial) प्रोजेक्ट का पर्यावरण, स्वास्थ्य और स्थानीय लोगों की जिंदगी पर असर समझने के लिए जन सुनवाई (Public Hearing) की जाती है।
🔹 प्रभावित लोग अपनी लिखित राय और आपत्तियां सरकार के सामने रख सकते हैं।
🔹 इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि प्रोजेक्ट से पर्यावरण और लोगों की सेहत को नुकसान न हो।
लेकिन अब सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि परमाणु और रणनीतिक खनिजों के खनन प्रोजेक्ट्स पर यह प्रक्रिया लागू नहीं होगी। हां, इन प्रोजेक्ट्स की जांच विशेषज्ञ समितियां (Expert Appraisal Committees) जरूर करेंगी।
रक्षा मंत्रालय की दलील
रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) ने 4 अगस्त को पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा था कि:
- रेयर अर्थ एलीमेंट्स (Rare Earth Elements) रक्षा क्षेत्र में अहम भूमिका निभाते हैं।
- इनका इस्तेमाल रडार, सोनार, सर्विलांस और नेविगेशन डिवाइस बनाने में होता है।
- साथ ही ये खनिज कम्युनिकेशन और डिस्प्ले डिवाइस, सैन्य वाहनों के माउंटिंग सिस्टम और सटीक हमले करने वाले हथियारों के निर्माण में भी उपयोगी हैं।
- चूंकि ये खनिज भारत में सीमित मात्रा में ही पाए जाते हैं और केवल दुनिया के कुछ ही हिस्सों में मिलते हैं, इसलिए देश में इनका उत्पादन बढ़ाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है।
- इस कारण इनके खनन को मंजूरी देने की प्रक्रिया में जनता की राय लेने से छूट दी जानी चाहिए।
परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) का पक्ष
परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) ने भी 29 अगस्त को पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा कि:
- थोरियम (Thorium) जैसे खनिज भारत के तीसरे चरण के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए बेहद जरूरी हैं।
- ये खनिज ज्यादातर समुद्री रेत (Beach Sand) से निकाले जाते हैं।
- भारत को अपने परमाणु कार्यक्रम को गति देने के लिए नई साइट्स से खनन शुरू करना होगा।
- इसलिए परमाणु खनिज प्रोजेक्ट्स को सार्वजनिक परामर्श से छूट मिलनी चाहिए।
सरकार की हालिया नीतियों से मेल खाता फैसला
यह कदम सरकार की हाल की नीतियों से भी जुड़ा है:
- खान मंत्रालय के कहने पर Parivesh पोर्टल पर ‘Critical Minerals’ के लिए अलग कैटेगरी बनाई गई है।
- वन (संरक्षण एवं संवर्धन) नियम, 2023 में जरूरी खनिजों के लिए विशेष प्रावधान जोड़े गए हैं।
- MMDR Amendment Act, 2023 (खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2023) में भी परमाणु और जरूरी खनिजों को शामिल किया गया है।








