युक्तियुक्तकरण पर उठे सवाल: पोड़ी उपरोड़ा BEO राजेश्वर दयाल सफाई में फंसे, बोले– न आदेश दिया, न संलग्नीकरण

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कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा। शासन के युक्तियुक्तकरण आदेश को चुनौती देते हुए शिक्षकों को मनमाफिक स्थान पर संलग्न करने का मामला इन दिनों पोड़ी उपरोड़ा के BEO राजेश्वर दयाल के लिए परेशानी का सबब बन गया है। खबरें सामने आने के बाद अब वे खुद सफाई देने में जुट गए हैं। उनका कहना है कि न तो उन्होंने कोई आदेश जारी किया और न ही किसी शिक्षक का संलग्नीकरण किया है।

शिक्षकों के मामले पर उठे सवाल

जानकारी के अनुसार—

  • प्रधान पाठिका लक्ष्मी सिदार का स्थानांतरण कन्या आश्रम हरदीबाजार से प्रा.शा. खुर्रुभांठा किया गया। लेकिन वे आज भी अपने पूर्व पदस्थ स्थान पर ही कार्यरत हैं।
  • स्वर्णलता भारती, जिन्हें प्रा.शा. नदियापार भेजा गया था, वे वर्तमान में कन्या छात्रावास पोड़ी उपरोड़ा में अधीक्षिका के रूप में कार्य कर रही हैं।
  • प्रिया नागवंशी, जिन्हें पहले कन्या आश्रम तुमान से प्रा.शा. केंदहाड़ांड भेजा गया था, उन्होंने दूरी और पारिवारिक समस्या का हवाला देते हुए BEO को आवेदन दिया था।

उनके आवेदन में साफ तौर पर लिखा था कि “एक माह के लिए शाला से कार्यमुक्त कर कन्या आश्रम तुमान में ही कार्य करने की अनुमति दी जाए।”
इस पर BEO दयाल ने आदेश जारी कर लिखा कि नए अधीक्षक के आने तक शिक्षिका को आश्रम संभालने की अनुमति दी जाती है।

खंडन में दिए तर्क

आरोप लगने के बाद BEO दयाल का कहना है कि—

  • “मैंने किसी शिक्षक का स्थानांतरण या संलग्नीकरण नहीं किया है।”
  • “जिनके नाम सामने लाए जा रहे हैं वे पहले से ही अपने-अपने पदों पर कार्यरत हैं।”
  • “प्रिया नागवंशी के मामले में केवल अस्थायी जिम्मेदारी सौंपी गई थी, यह संलग्नीकरण नहीं है।”

नियम और वास्तविकता में टकराव

हालांकि शिक्षा विभाग के जानकारों का कहना है कि प्रिया नागवंशी को शाला से कार्यमुक्त कर आश्रम में कार्य करने की अनुमति देना सीधे-सीधे संलग्नीकरण की श्रेणी में आता है। ऐसे में BEO की सफाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

लगातार विवादों में BEO

औचक निरीक्षण और सख्त छवि वाले माने जाने वाले BEO दयाल पर अब आरोप लग रहे हैं कि वे शिक्षकों की वास्तविक पदस्थापना और शासन के आदेशों को नजरअंदाज कर मनमानी कर रहे हैं। फिलहाल शासन की युक्तियुक्तकरण नीति और जमीनी हकीकत के बीच यह विवाद गहराता जा रहा है।

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